‘माहिरा शर्मा को ‘बिग बॉस’ में स्वतंत्र रूप से खेलने की जरूरत’

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अभिनेत्री माहिरा शर्मा की मां सानिया शर्मा का कहना है कि पारस छाबड़ा और उनकी बेटी ने ‘बिग बॉस’ शो में एक मजबूत संबंध बनाया है लेकिन माहिरा को अब स्वतंत्र रूप से खेलने की जरूरत है। सानिया ने कहा, “मैं बहुत खुश और संतुष्ट हूं कि माहिरा ‘बिग बॉस’ के घर में कैसे खेल रही है। वह चीजों, स्थितियों और लोगों के प्रति तटस्थ है। वह न तो बहुत शांत है, न ही बहुत आक्रामक और न ही गाली देने वाली है। मैं खुश हूं कि उसने परिवार की अच्छाई को दिमाग में रखा क्योंकि हम इस तरह की बातों में विश्वास नहीं करते हैं।”

उन्होंने कहा, “वह दावेदारों में सबसे छोटी है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर सबसे कठिन भी साबित हो सकती है। उसने सभी कार्यों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है। वहां घर में दोस्त रखना अच्छा है, लेकिन उसे किसी पर भी अंध विश्वास नहीं करना चाहिए, भले ही वह उसका सबसे करीबी क्यों न हो।”

न्यूज स्त्रसेत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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