‘संकटमोचक’ महेंद्र सिंह धोनी आखिर क्यों ‘संकट’ में ही काम नहीं आते

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जयपुर( स्पोर्ट्स डेस्क) महेंद्र सिंह धोनी की गिनती दुनिया के महान फिनिशर में होती है लेकिन बीते दिन सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के लिए मैच फिनिश नहीं कर पाए। बता दें कि मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले खेलते हुए निर्धारित 50 ओवर में 8 विकेट पर 239 रनों का स्कोर खड़ा किया।

वहीं इसके जवाब में भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करने उतरी जहां टॉप ऑर्डर पूरी तरह फ्लॉप रहा है। भारतीय टीम के टॉप 3 बल्लेबाज़ जिनमें रोहित, विराट और केएल राहुल 1-1 रन बनाकर आउट हुए। मैच में टॉप ऑर्डर के ध्वस्त होने से पूरा दबाव मिडिल ऑर्डर पर आ गया। जहां कुछ पल तो पंत ने पारी को संभाला पर इसके बाद वह भी चलते बने । टीम इंडिया पर संकट के बादल मंडराने लगे थे ऐसे में उम्मीद थी कि महेंद्र सिंह धोनी बढ़िया करेंगे। हम सभी जानते हैं कि महेंद्र सिंह धोनी को संकटमोचक कहा जाता है लेकिन वह टीम इंडिया को संकट से नहीं निकाल सकें। महेंद्र सिंह धोनी ने 72 गेंदों में 50 रनों की पारी खेली और वह मार्टिन गुप्टिल के जरिए मैच में रन आउट का शिकार हो गए। धोनी की धीमी पारी टीम इंडिया के लिए परेशानी का सबब बनी है और भारतीय टीम अंत में जाकर मुकाबला हार गई। धोनी की पारी से फैंस भी नाखुश हैं और इस बात को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्यों महेंद्र सिंह धोनी हर बार संकटमोचक की भूमिका निभाने में नाकाम रहते हैं। धोनी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आक्रामक और तेज बल्लेबाज़ी की होती है तो सेमीफाइनल मुकाबले का परिणाम कुछ और ही होता ।

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