महावीर जयंती: जानिए वर्धमान से भगवान महावीर बनने की कहानी

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जयपुर। आज का दिन जैन समाज के लिए विशेष दिन हैं, आज जैन समाज के साथ साथ पूरा देश महावीर जयंती का पर्व मना रहा है। भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र मास  की शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था। इस दिन को महावीर के जन्मोत्सव के दिन के रुप में माना जाता है।

भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, इनकी शिक्षा आज से समय में भी प्रासंगिकता रखती है। इन्होने विश्व को सत्य और अहिंसा का संदेश दिया, व स्वयं भी पूरे जीवन सत्य अहिंसा के मार्ग में चलें।

भगवान महावीर का जन्म एक राज परिवार में हुआ इनके पिता का नाम कुंडलपुर के राज परिवार में पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहाँ तीसरी संतान के रूप में हुआ, इनके बचपन का नाम वर्धमान था। बचपन से ही वर्धमान  का राजपाठ में कोई रुचि नहीं थी, इन्होंने तीस वर्ष की उम्र में सांसारिक सुख व राज्य के भोग विलास को त्याग राज-पाठ, परिवार, धन-संपदा का त्याह कर संयास ले लिया था।

इसके बाद इन्होंने लोगों को सत्य, अहिंसा और प्रेम का मार्ग दिखाया और उस मार्ग पर सभी को चलना सिखाया। 30 वर्ष की आयु में ज्ञान की प्राप्ति लिए घर छोड़ दिया। भगवान महावीर में क्षमा करने का अद्भुत गुण था और कहा जाता है कि क्षमा वीरस्य भूषणम। जिसके बाद से इनको महावीर कहा जाने लगा।

इसी के साथ महावीर ने समाज को अपरिग्रह, अनेकांत और रहस्यवाद का मौलिक दर्शन समाज को दिया और कर्मवाद की अवधारणा समाज को दी।

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