महाराष्ट्र एटीएस ने सनातन संस्था के संदिग्ध कार्यकर्ता को धर दबोचा

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महाराष्ट्र आतंकवाद-निरोधक दस्ता (एटीएस) ने दक्षिणपंथी सनातन संस्था के एक संदिग्ध कार्यकर्ता को धर दबोचा और उसके पालघर स्थित घर से शुक्रवार सुबह कुछ विस्फोटक सामग्री बरामद की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

कार्यकर्ता की पहचान वैभव राउत के रूप में की गई है। मुंबई के उपक्षेत्र नाला सोपारा में छापा मारने के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। एटीएस ने हिंदू समूह के सदस्य को पकड़ने के लिए खोजी कुत्तों का इस्तेमाल किया। राउत को पालघर से मुंबई ले जाया गया और बाद में उसे अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

एटीएस ने उनके घर और नाला सोपारा के भंडाराली इलाके में छापे के दौरान कुछ बम बनाने वाली सामग्री बरामद की है, जिसमें डेटोनेटर्स, विस्फोटक पाउडर आदि बरामद किए गए हैं।

हालांकि, राउत के वकील संजीव पुन्हालेकर ने मीडिया से कहा कि राउत सनातन संस्थान के कार्यकर्ता नहीं हैं और उनका नाम संगठन को बदनाम करने के लिए जोड़ा जा रहा है। राउत के हिंदू जनजागृति समिति से जुड़े होने की भी बातें कही जा रही हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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