मद्रास उच्च न्यायालय ने टिकटॉक से प्रतिबंध हटाया

0

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने बुधवार को चीनी कंपनी बाइटडांस की स्वामित्व वाला मोबाइल एप्लीकेशन टिकटॉक से कुछ शर्तो के साथ प्रतिबंध हटा लिया।

अधिवक्ता मुथुकुमार द्वारा दायर मुकदमे में फैसला देते हुए पीठ ने ऐप से अंतरिम प्रतिबंध इस शर्त पर हटा लिया कि ऐप पर अश्लील वीडियो अपलोड नहीं किया जाएगा।

अदालत ने कहा कि ऐसा किए जाने पर अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

टिकटॉक ने एक बयान में कहा, “हम इस फैसले से खुश हैं और हमारा मानना है कि इसका स्वागत भारत में हमारे बढ़ते समुदाय के द्वारा भी किया जाएगा, जो टिकटॉक का उपयोग अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन के लिए करता है।”

इससे पहले इसी महीने उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता मुथुकुमार द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार को भारत में ऐप को डाउनलोड करने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था और मीडिया को ऐप का उपयोग करके लिए गए वीडियो को प्रसारित करने से मना कर दिया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleआईएलएंडएफएस को दिए कर्ज का खुलासा करें, आरबीआई ने बैंकों से कहा
Next articleप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में आज करेंगे रोड शो
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here