गंगा की खातिर स्वामी सानंद के निधन से मध्यप्रदेश में शोक

0
196

गंगा नदी निर्मल और अविरल हो, प्रदूषण मुक्त किया जाए, गंगा की रक्षा का कानून बने, बांधों का निर्माण बंद हो, इन मांगों को लेकर गंगा नदी के तट पर हरिद्वार में 112 दिन से अनशन करते प्रो. जी.डी. अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के निधन से मध्यप्रदेश का हर वर्ग दुखी और व्यथित है। राजनेताओं से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक ने स्वामी सानंद के निधन को बड़ी क्षति करार दिया है। एकता परिषद के संस्थापक डॉ. पी.वी. राजगोपाल ने डॉ. अग्रवाल के निधन को समाज की बड़ी क्षति करार देते हुए कहा कि लोकनायक जयप्रकाश के जन्म दिवस पर डॉ. अग्रवाल दुनिया से विदा हुए हैं। जयप्रकाश ने सत्ता को जनता की ताकत का अहसास करा दिया था।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने को गंगा का बेटा बताया था, मगर बीते चार साल में गंगा के लिए कुछ नहीं हुआ। योजना बनी, नमामि गंगे नाम दिया गया, मगर धरातल पर कोई काम नहीं किया गया। डॉ. अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे, उन्हें उनके वादे याद दिलाए, मगर ध्यान नहीं दिया गया। आखिरकार स्वामी ने अपने प्राण की आहुति दे दी।”

‘जल जन जोड़ो’ अभियान की ओर से जारी विज्ञप्ति में स्वामी सानंद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है। इस अभियान से जुड़े कई कार्यकर्ता हरिद्वार पहुंच रहे हैं।

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने डॉ. अग्रवाल के निधन पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “अग्रवाल की मांग सिर्फ गंगा नदी की खातिर थी। वही गंगा, जिसने प्रधानमंत्री को बुलाया था, ऐसा वे स्वयं कहते रहे हैं। आज गंगा का वास्तविक लाडला, हमारे बीच से चला गया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleसोनी नोर्डे मोहन बागान से जुड़ेंगे, जानिए इसके बारे में !
Next articleत्योहारी सीजन में डीटल ने बाजार में उतारी ब्लूटूथ स्पीकर की नई रेंज
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here