मध्य प्रदेश : सरकारी अस्पताल में पोलियो ड्रॉप की कमी

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पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान जारी है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में ही लोगों को पोलियो की खुराक नहीं मिल पा रही है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला अस्पताल में कई दिनों तक लोगों को खुराक के लिए भटकना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता आर. के. थापक ने बुधवार को बताया, “छतरपुर जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं को पोलियो खुराक नहीं मिल पा रही है। कई-कई दिनों तक लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन स्थितियों में सरकार की मंशा कैसे पूरी होगी, यह सवाल है।”

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिले में पिछले दो माह से पोलियो ड्रॉप नहीं है। इसके कारण सरकारी अस्पतालों, निजी नìसग होम में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को पोलियो ड्रॉप नहीं पिलाई जा रही है।

छतरपुर के सीएमएचओ डॉ. वी. एस. बाजपेयी से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “बुधवार को खुराक अस्पताल में आ गई है। यह बात सही है कि खुराक की कमी कई बार हो जाती है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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