मध्य प्रदेश : खजुराहो में भाजपा को नए चेहरे की तलाश

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मध्य प्रदेश में भाजपा की गढ़ मानी जा रही लोकसभा सीटों में से एक खजुराहो संसदीय सीट भी है। यहां भाजपा बीते तीन चुनावों से लगातार जीतती आ रही है। लिहाजा, भाजपा को इस बार नए चेहरे की तलाश है, जो चुनाव जीतने की क्षमता रखता हो, क्योंकि वर्तमान सासंद नागेंद्र सिंह हाल ही में विधानसभा चुनाव जीते हैं।

खजुराहो संसदीय सीट पर नजर दौड़ाई जाए तो वर्ष 1977 के बाद से हुए लोकसभा के 11 चुनावों में कांग्रेस को सिर्फ तीन बार ही जीत हासिल हो सकी है। इस सीट से कांग्रेस की विद्यावती चतुर्वेदी दो बार व उनके पुत्र सत्यव्रत चतुर्वेदी एक बार निर्वाचित हुए। भाजपा नेत्री व मौजूदा केंद्रीय मंत्री उमा भारती यहां से वर्ष 1991, 1996 और 1998 में निर्वाचित हुई थीं। अब इस सीट पर कांग्रेस ने राजनगर से विधायक विक्रम सिंह की पत्नी कविता सिंह को उम्मीदवार बनाया है। कविता सिंह महाराजा छत्रसाल के राजघराने से आती हैं।

कांग्रेस की ओर से कविता सिंह को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से भाजपा में नए और साफ-सुथरी छवि के नेता की तलाश तेज हो गई है। कविता सिंह खजुराहो नगर परिषद की अध्यक्ष हैं। दूसरी ओर भाजपा उन सभी नामों को तौल रही है, जिनका प्रभाव इस संसदीय क्षेत्र के सभी विधानसभा क्षेत्रों तक हो।

खजुराहो संसदीय क्षेत्र में छतरपुर जिले के दो, पन्ना के तीन और कटनी जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इन आठ विधानसभा क्षेत्रों में से तीन पर कांग्रेस का और पांच पर भाजपा का कब्जा है।

बुंदेलखंड के राजनीतिक विश्लेषक रवींद्र व्यास का कहना है कि खजुराहो संसदीय क्षेत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम है। कांग्रेस के साथ भाजपा भी जीत के लिए पूरा जोर लगाएगी। भाजपा के पास इस क्षेत्र में वर्तमान में चुनाव लड़ाने के लिए कोई दिग्गज या बड़ा नाम नहीं है। हां, जमीनी कार्यकर्ता जरूर हैं। पार्टी के लिए एक साफ -सुथरे और हर हिस्से के कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद रखने वाले नेता की दरकार है।

भाजपा के सूत्रों का कहना है कि खजुराहो संसदीय क्षेत्र से भाजपा की ओर से विधायक संजय पाठक, पूर्व मंत्री ललिता यादव, युवा नेता संजय नगायच, सामाजिक कार्यकर्ता और जमीनी स्तर पर काम करने वाली डॉ. नंदिता पाठक जोर लगाए हुए हैं। इन नामों पर मंथन जारी है। संगठन के सामने सभी चारों दावेदारों की खूबियां और खामियां सामने हैं।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, ललिता यादव पिछड़ा वर्ग से आती हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रही हैं। मगर उनके लिए अभी हाल ही में विधानसभा चुनाव ‘हारना’ बड़ी बाधा बन रहा है। वहीं संजय पाठक लोकसभा चुनाव लड़ने की ज्यादा इच्छा नहीं दिखा रहे हैं। उनका इस क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों में खासा प्रभाव है। वहीं, संजय नगायच और डॉ. पाठक की ओर से लगातार दावेदारी की जा रही है।

सूत्रों की मानें तो पार्टी की ओर से संभावित नामों पर मंथन जारी है। मुख्य दावेदारों में नगायच पन्ना केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे हैं। उनका पन्ना जिले में प्रभाव है, मगर संसदीय क्षेत्र के कई नेता खुले तौर पर उनका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान पवई से उम्मीदवार घोषित किए जाने पर बृजेंद्र प्रताप सिंह का विरोध किया था। इसके चलते बृजेंद्र सिंह को पन्ना से विधानसभा चुनाव लड़ना पड़ा और जीते भी। बदलाव के लिए भाजपा को पूर्व मंत्री कुसुम महदेले का पन्ना विधानसभा क्षेत्र से टिकट काटना पड़ा था। इसलिए भी कई नेता नगायच का विरोध कर रहे हैं।

डॉ. नंदिता पाठक पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्तंभ नानाजी देशमुख का विशेष स्नेह रहा। वे चित्रकूट में लंबे समय तक सक्रिय रहीं। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए काम किया, बुंदेलखंड की महिलाओं को सशक्त बनाने का अभियान चलाया और लगभग पांच सौ गांवों की महिलाओं को स्वावलंबी बनाया।

नंदिता का छतरपुर के निवासी डॉ. भरत पाठक के साथ उनका विवाह हुआ है। भरत गंगा अभियान में खास भूमिका निभा रहे हैं। वहीं संघ से उनकी नजदीकियां हैं। सामाजिक कार्यो में सक्रिय रहीं, मगर स्थानीय राजनीति में उनकी दखलंदाजी नहीं रहीं। उन पर राजनीतिक तौर पर ज्यादा सक्रिय न होने के आरोप जरूर लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक व्यास के अनुसार, बीते तीन चुनाव से भाजपा लगातार चेहरे बदलती आ रही है। वर्ष 2004 में रामकृष्ण कुसमरिया जीते, 2009 में जीतेद्र सिंह बुंदेला जीते और वर्ष 2014 में नागेंद्र सिंह जीते। नागेंद्र सिंह विधानसभा का चुनाव जीते हैं। भाजपा ने विधायक को चुनाव न लड़ाने का मन बनाया है, इस स्थिति में अब भाजपा को एक बार फिर नए चेहरे को चुनना है। फिलहाल भाजपा में मंथन जारी है और नए चेहरे को मौका मिलने के आसार ज्यादा हो गए हैं।

खजुराहो संसदीय क्षेत्र में छह मई को मतदान होने वाला है। इस संसदीय क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग से आनेवाले मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। यही कारण है कि यहां से वर्ष 1977 के बाद हुए 11 चुनावों में पांच बार पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार जीते हैं। इसके साथ ही चार बार ब्राह्मण और दो बार ठाकुर सांसद निर्वाचित हुए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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