मध्य प्रदेश : पूर्व सांसद गुड्डू भाजपा से निष्कासित

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भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई ने पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।

विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व सांसद गुड्डू ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और उनके बेटे अजीत बोरासी ने भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और हार गए थे।

पूर्व सांसद गुड्डू ने पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में आए पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर गंभीर आरोप लगाए थे, इसके बाद पार्टी की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस का गुड्डू ने जवाब नहीं दिया उसी के बाद पार्टी ने यह कार्रवाई की है।

भाजपा के प्रदेश कार्यालय मंत्री सत्येंद्र भूषण सिंह ने गुड्डू को पत्र लिखकर कहा है कि आपको 19 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसका जवाब आज तक प्राप्त नहीं हुआ। यह घोर अनुशासनहीनता की परिधि में आता है इसलिए प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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