मध्य प्रदेश : कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव हारे नेताओं पर लगाया दांव

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आगामी लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने उन कई नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में हार गए थे। कांग्रेस की ओर से अबतक घोषित 22 उम्मीदवारों में पांच ऐसे नेता शामिल हैं।

आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से बेहतर नतीजे लाने की बड़ी चुनौती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 29 में से सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की थी और बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने रतलाम लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। इस बार के लोकसभा चुनाव के समय राज्य में कांग्रेस की सत्ता है और वह बीते लगभग चार माह के कामकाज के आधार पर अपनी बढ़त बनाने की कोशिश में है। लेकिन पार्टी ने विधानसभा चुनाव में हारे नेताओं को फिर उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस ने अब तक 22 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें पांच ऐसे उम्मीदवार हैं, जो अभी हाल ही में विधानसभा का चुनाव हार गए थे। कांग्रेस ने इन हारे उम्मीदवारों में से अजय सिंह को सीधी से, अरुण यादव को खंडवा से, रामनिवास रावत को मुरैना से, प्रताप लोधी को दमोह से और मधु भगत को बालाघाट से मैदान में उतारा है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा कहते हैं, “पार्टी ने कार्यकर्ताओं के बीच एक सर्वे कराया और जिन नेताओं के नाम निकल कर आए, उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है।”

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा कहते हैं, “राज्य में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। अजय सिंह, अरुण यादव और रामनिवास रावत पार्टी के ऐसे नेता हैं, जो जीतकर आते तो मंत्रिमंडल में उनकी बड़ी हैसियत होती। लिहाजा क्षेत्र के मतदाताओं को भी अब लगता है कि आखिर क्यों हरा दिया। मतदाताओं में सरकार किसी दल की बने और उनका विधायक दूसरे दल का हो तो चुनाव हारे नेता के प्रति सहानुभूति ज्यादा होती है।”

मिश्रा का कहना है, “कोई भी राजनीतिक दल हो, वह चुनाव जीतने के लिए सारे तौर-तरीके अपनाता है, रणनीति बनाता है। उसी के तहत कांग्रेस ने भी सहानुभूति वोट पाने की रणनीति बनाई है। जो नेता विधानसभा चुनाव हारे थे, वे पूर्व में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, उनका अपने क्षेत्र में प्रभाव भी है और उनके अलावा पार्टी के पास दूसरा जनाधार वाला नेता भी नहीं है। इस स्थिति में पार्टी ने एक तरफ जनाधार तो दूसरी ओर सहानुभूति पाने के लिए उन नेताओं पर दांव लगाया।”

मिश्रा की बात कमोवेश उचित लगती है। क्योंकि इन नेताओं ने जनता से भावनात्मक अपील की है।

पूर्व मंत्री अजय सिंह ने अपने अंदाज में लोगों से भावनात्मक अपील की है। पिछला चुनाव वह सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से साढ़े छह हजार वोटों से हार गए थे।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है, “अगर चुनाव हार गए तो यह उनका अंतिम चुनाव होगा। इस बार गड़बड़ हुई तो हमें और आपको कोई नहीं पूछेगा। कांग्रेस पार्टी मुझे कोई न कोई पद दे देगी, हो सकता है एक साल बाद राज्यसभा में भेज दे, लेकिन आप लोगों का क्या होगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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