मध्य प्रदेश : आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताले लटकने का खतरा, लाखों बच्चों पर संकट

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गरीब बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास का आधार बने हजारों आंगनवाड़ी केंद्रों का किराया न चुकाए जाने के कारण अब बच्चों के सिर से छत छिनने का खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि इन केंद्रों पर ताले लगने की स्थिति है। सरकार के पास अभी पैसा नहीं है, जिसके कारण कई केंद्रों का चार से आठ माह का किराया नहीं चुकाया जा सका है।

राज्य के मंदसौर और आगर-मालवा जिले से आ रही खबरें संकट से जूझ रहे आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बयां कर रही हैं।

मंदसौर के वार्ड 40 के आंगनवाड़ी केंद्र सहित चार अन्य केंद्रों पर ताले सिर्फ इसलिए लगा दिए गए, क्योंकि केंद्र का किराया ही कई माह से मकान मालिक को नहीं मिला था। बाद में प्रशासन के आश्वासन पर मकान मालिक ने ताले खोले।

इसी तरह आगर-मालवा में तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वयं अपने वेतन से केंद्र का किराया दिए जा रही है, जिसके कारण केंद्र पर ताला नहीं लग पाया है।

राज्य में छह साल तक के बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान में रखकर आंगनवाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों में बच्चों को शिक्षा के साथ पोषण आहार भी दिए जाते हैं। ये केंद्र बच्चों के अस्थाई तौर पर दूसरे घर बन चुके हैं।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका एकता यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष विद्या खंगार ने आईएएनएस को बताया है, “राज्य में कुल 97,139 आंगनवाड़ी केन्द्र हैं। इनमें से 29,383 आंगनवाड़ियां निजी भवनों में चल रही हैं। इनमें से लगभग 26,000 केद्रों को कई महीने से किराया नहीं दिया गया है। इसके कारण कई स्थानों पर मकान मालिकों ने ताला तक लगा दिया। जबलपुर में पिछले दिनों आंदोलन हुआ तब जाकर कई केंद्रों का किराया मिल पाया।”

ज्ञात हो कि आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब और कमजोर तबके से होते हैं। राज्य में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं। वर्ष 2016 से 2018 के बीच राज्य में 57 हजार बच्चों की कुपोषण के कारण मौत हो चुकी है।

खंगार बताती हैं, “निजी भवनों में चल रहे केद्रों की हालत जर्जर होती है, उनमें सीलन होती है। इन भवनों को किराए पर लेना हमारी मजबूरी होती है, क्योंकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को तय किराए के अनुसार भवन खोजना होता है। ऐसे भवनों में सुविधाओं का टोटा होता है।”

राज्य की महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी भी मानती हैं, “राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों का 62 करोड़ रुपये का बजट है, जिसमें से 20 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है, शेष राशि के भुगतान के लिए वित्त विभाग को पत्र लिखा गया है।”

वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निजी भवनों में चलने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों में ताले लगने के मंडराते संकट पर तंज कसा है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “आंगनवाड़ी केंद्रों के किराए का भुगतान न करने से बच्चों का भविष्य मुश्किल में पड़ने वाला है और सरकार अपने में मस्त है।”

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, एक आंगनवाड़ी केंद्र में 40 बच्चे आते हैं। इसके अलावा छह माह से तीन साल तक के बच्चों को पोषण आहार दिया जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इन केंद्रों से सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। निजी भवनों में चलने वाले केंद्रों का जल्दी भुगतान नहीं किया गया तो कई स्थानों पर ताले लटक सकते हैं। जिससे लाखों बच्चों के सामने मुसीबत खड़ी हो सकती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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