अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुद को अकेला महसूस करती थीं Louise Redknap

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गायिका लुईस रेडकनाप ने हाल ही में जारी अपनी किताब ‘यू हैव गॉट दिस’ में इस बात का खुलासा किया है कि पूर्व पेशेवर फुटबॉलर जेमी रेडकनाप संग अपनी शादी के आखिरी कुछ हफ्तों में वह खुद को महत्वहीन महसूस करती थीं। डेलीमेल डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी किताब में लुईस ने यह भी लिखा है कि उस दौरान उन्हें खुद को यह समझाना चाहिए था कि अपने आप के बारे में ऐसा महसूस करना सही नहीं है।

लुईस ने लिखा है, “काफी लंबे समय तक मैंने एक ‘पिक्च र-परफेक्ट’ वाइफ बनने की कोशिश की थी। उस दौरान मैंने खुद को अकेला, महत्वहीन और तनाव में पाया। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो सोचती हूं कि काश मैं यह समझा पाती कि मैं किस तरह से संघर्ष कर रही थी, साथ में बिताई जा रही हमारी जिंदगी में मैं खुद को कितना हीन समझ रही थी, किस कदर इन चीजों ने मुझे परेशान कर रखा था।”

लुईस और जेमी की शादीशुदा जिंदगी 20 साल की थी। इनके दो बच्चे हैं। साल 2018 में ये एक-दूसरे अलग हो गए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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