राजस्थान से ओडिशा तक टिड्डी का टेरर, दक्षिण भारत अछूता

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पाकिस्तान के रास्ते भारत में घुस आए टिड्डी दल ने राजस्थान से लेकर ओडिशा तक कई सूबे की सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। जिन राज्यों में टिड्डियां तांडव मचा रही हैं, वहां की सरकारें केंद्र की मदद से हरियाली के इस दुश्मन का खात्मा करने में जुटी हैं। वहीं, जिन राज्यों में अब तक टिड्डी दल ने दस्तक नहीं दिया है, वहां की सरकारी मशीनरी अलर्ट पर है और सरकार की ओर से किसानों को एडवायजरी जारी की गई है।

मगर, दक्षिणी भारतीय राज्यों में टिड्डियों की पहुंचने की संभावना कम है। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि आनेवाले दिनों में माइग्रेटरी पेस्ट टिड्डी के पश्चिमी सीमा से भारत में आने की संभावना बनी रहेगी और यह संपूर्ण उत्तर-पश्चिम भारत समेत बिहार और उड़ीसा तक दस्तक दे सकता है, लेकिन दक्षिण भारत में फिलहाल इसके पहुंचने की संभावना कम है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को देश में टिड्डी की गतिविधियों और उस पर नियंत्रण को लेकर जारी एक बयान में कहा, “आज भारत-पाक सीमा से टिड्डी दल के देश में प्रवेश की कोई सूचना नहीं है जबकि 26 मई को राजस्थान के श्रीगंगानगर के रास्ते राजस्थान में प्रवेश किया था। टिड्डी दल पर नियंत्रण का अभियान जारी है।”

जानकारी के अनुसार, देश की सीमा में घुस आए टिड्डी दल राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके में सक्रिय हैं, जबकि देश की राजधानी दिल्ली समेत हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। उधर, उड़ीसा और बिहार में भी टिड्डी दल के खतरे से निपटने की तैयारी की गई है।

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने भी 27 मई को अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजस्थान में जुलाई तक टिड्डी दलों के लगातार कई हमले जारी रहने की संभावना है जो पूरे उत्तर भारत के साथ-साथ बिहार और उड़ीसा तक जा सकते हैं और मानसून के दौरान हवा का रूख बदलने से वापस राजस्थान की तरफ का रुख कर सकते हैं। एफएओ के अनुसार, टिड्डी दल के ब्रीडिंग शुरू होने पर इनकी गतिशीलता कम हो जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय संगठन का भी अनुमान है कि टिड्डी दलों के दक्षिण भारत,नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंचने की संभावना कम है।

एफएओ के अनुसार, पश्चिम बंगाल में आए चक्रवाती तूफान अम्फान के कारण तेज पछुआ पवन से टिड्डी दल की गतिविधि जुड़ी हुई है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार तक मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, उज्जैन, रतलाम, देवास, आगरमालवा, छतरपुर, सतना व ग्वालियर, राजस्थान के जैसलमेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, भीलवाडा, सिरोही, जालोर, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़, दौसा, चुरू, सीकर, झालावाड़, जयपुर, करौली एवं हनुमानगढ़, गुजरात के बनासकांठा और कच्छ, उत्तरप्रदेश में झांसी और पंजाब के फाजिल्का जिले में 334 स्थानों पर 50,468 हेक्टेयर क्षेत्र में हॉपर और गुलाबी झुंडों को नियंत्रित किया गया।

नूयज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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