कोरोना का खेती पर असर! किसानों को आधे दामों में बेचनी पड़ रही मक्का, ये है वजह

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कोरोना महामारी और लॉकडाउन का भार देश के किसानों पर पड़ रहा है। इस बीमारी के कारण किसानों को मक्के का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा है कि मक्के की ओद्योगिक मांग पर ब्रेक लग गए हैं। वहीं मक्का के उत्पादन में नया रिकॉर्ड है। इस साल मक्का, चावल, गेंहू सहित मोटे अनाजों की उत्पादन ज्यादा हुआ है।

इसके चलते निकट भविष्य में मोटे अनाज की कीमतों में तेजी आने के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस बार किसानों ने मक्का की खेती ज्यादा की थी लेकिन खपत कम होने से मांग में गिरावट आई है। बिहार राज्य में साल के तीनों सीजन खरीफ, रबी और जायद के दौरान मक्के की खेती की जाती है। लेकिन राज्य में रबी सीजन में मक्का की पैदावार सबसे ज्यादा होती है।

बीते साल मक्का की फसल की पैदावर के बाद किसानों को ऊंचे भाव मिले थे। इसके चलते किसानों का रूझान मक्का की खेती की तरफ चला गया। खबरों के अनुसार, बिहार के मधेपुरा जिले के महाराजगंज में एक किसान ने पांच दिन पहले 1050 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मक्का बेची है। किसानों की मानें तो इस साल मक्का को उगाना घाटे का सौदा रहा है।

भारत में मक्के के कुल उत्पादन का करीब 47 प्रतिशत से ज्यादा उपयोग पोल्ट्री फीड में किया जाता है। 14 प्रतिशत कैटल फीड और स्टार्च उद्योग में करीब 12 प्रतिशत मक्का काम में ली जाती है। मक्का की खेती तेलंगाना, बिहार, कर्नाटक और महाष्ट्र सहित कई राज्यों में की जाती है।

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