मंच पर होने के डर से उबरने में Lionel Richie को लगे आठ साल

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गायक लियोनेल रिची ने इस बात को स्वीकारा कि उन्हें मंच पर होने से डर लगता था और इस डर से उबरने और खुद को सहज बनाने में उन्हें पांच से आठ साल का वक्त लगा। रिची ने ‘द ड्रियू बैरीमोर शो’ में इसका खुलासा तब किया, जब कार्यक्रम के मेजबान बैरीमोर ने उनसे पूछा, “मैंने दरअसल एक कहानी सुन रखा है कि जब आप कमोडोर (बैंड) में थे तो फ्रंट मैन बनने में कुछ हिचकिचा रहे थे। क्या यह सच है?”

इसके जवाब में गायक ने कहा, “यह बिल्कुल सच है। मैं इतना डरा हुआ था कि जब फ्रेशमैन टैलेंट शो में पर्दा उठा, तो उसके साथ-साथ मैं भी वहां से बाहर निकल लिया।”

भारत में जी कैफे पर प्रसारित होने वाले इस शो में रिची ने आगे कहा, “मंच पर सहज होने में मुझे कुछ पांच से आठ साल का वक्त लगा, लेकिन एक वक्त था जब मुझे मंच पर होने से काफी ज्यादा डर लगता था। दरअसल, जैकसन 5 टूर में शामिल होने के बाद मुझे इस पर काबू पाने में कुछ मदद मिली थी।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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