ल्हासा में वायु की गुणवत्ता दर 99.7 प्रतिशत

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वर्ष 2019 में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में वायु की गुणवत्ता दर 99.7 प्रतिशत थी, जो देश के 168 मुख्य शहरों में शीर्ष पर रहा। मुख्य नदियों और झीलों की जल गुणवत्ता मानक दर को पार कर 100 प्रतिशत है। इसके अलावा शहर में जल गुणवत्ता निरंतर रूप से सुधर रही है और भूमि पर्यावरण की आम गुणवत्ता स्थिर हो रही है। 29 जुलाई को ल्हासा नगर सरकार अनुसार वर्ष 2019 में ल्हासा ने पहाड़ों पर वृक्षारोपण और नदियों के सुधार पर बड़ा जोर दिया है। अब ल्हासा में हरित आवरण दर 36.27 प्रतिशत है, वहीं वन आवरण दर 19.77 प्रतिशत है। लालू दलदल संरक्षण क्षेत्र का क्षेत्रफल 0.44 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है और जलक्षेत्र एक तिहाई से बढ़ा है।

ल्हासा शहर ने ऊर्जा ढांचे में भी सुधार किया है। प्राकृतिक गैस का उपभोग 20.4 प्रतिशत बढ़ा है, नवीन ऊर्जा से संचालित बसों का अनुपात 80 प्रतिशत तक जा पहुंचा है और सभी टैक्सी स्वच्छ ऊर्जा का प्रयोग करती हैं।

इसके अलावा ल्हासा ने कचरों के वर्गीकरण में 2 करोड़ 65 लाख 95 हजार युआन की पूंजी लगायी है और जैविक अपशिष्टों का 100 प्रतिशत निपटारा किया जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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