तसलीमा नसरीन का उपन्यास ‘बेशरम’ का लोकार्पण शनिवार को

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विश्वप्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन विश्व पुस्तक मेले में शनिवार 2 बजे राजकमल प्रकाशन के ‘जलसाघर’ पर अपनी पुस्तक ‘बेशरम’ का लोकार्पण के दौरान मौजूद रहेंगी। बेशरम उपन्यास तसलीमा नसरीन के 1993 में आये ‘लज्जा’ उपन्यास की उत्तर कथा है तथा राजकमल प्रकाशन द्वारा इसे प्रकाशित किया गया है। लज्जा उपन्यास के कारण ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूहों द्वारा लेखिका पर फतवा जारी किया गया था तथा किताब पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। लेखिका आज भी निर्वाषित जीवन व्यतीत कर रहीं हैं। इस उपन्यास का बांग्ला भाषा से हिंदी में अनुवाद उत्पल बैनर्जी द्वारा किया गया है।

लेखिका तसलीमा नसरीन के अनुसार, व्यवस्था की बेशर्मी के विरुद्ध मुखर होती चेतना के आत्मसंघर्ष को रेखांकित करता उपन्यास है ‘बेशरम’।

लेखिका तसलीमा नसरीन का बेशरम उपन्यास उन लोगों के बारे में हैं जो अपनी जन्मभूमि को छोड़कर किसी और देश में, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पराये माहौल पर परायी आबोहवा में अपना जीवन बिता रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं कि तसलीमा ने यह जीवन बहुत नजदीक से जिया है।

उनकी विश्वस्तर पर चर्चित पुस्तक लज्जा के लिए उन्हें कट्टरपंथियों ने देशनिकाला दे दिया था। लम्बे समय से वह अपने मुल्क से बाहर हैं। इस उपन्यास में उन्होंने अपनी जड़ों से उखड़े ऐसे ही जीवन की मार्मिक और विचारोत्तेजक कथा कही है। स्वयं उनका कहना है कि यह उपन्यास लज्जा की तरह राजनीतिक नहीं है, इसका उद्देश्य निर्वासन की सामजिक दुर्घटना और उसकी परिस्थतियों को रेखांकित करना है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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