लालू यादव की बेटी मीसा भारती और दामाद शैलेश को मिली जमानत मिली, जानिए पूरा मामला ! 

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सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की अदालत ने 8,000 करोड़ रुपये के धनशोधन मामले में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार को सोमवार को जमानत दे दी। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने प्रवर्तन निदेशालय की जमानत दिए जाने की आपत्तियों को खारिज करते हुए दोनों को जमानत दे दी। हालांकि, अगले आदेश तक दंपति के देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।

राजद से सांसद मीसा भारती और उनके पति अदालत द्वारा तलब किए जाने के बाद अदालत में पेश हुए। पिछले साल 23 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन निवारक अधिनियम के तहत 8,000 करोड़ रुपये धनशोधन मामले में मीसा के चार्टर्ड अकाउंटेंट और उनके पति व अन्य के खिलाफ तीसरा आरोपपत्र दाखिल किया था।

पिछले साल जुलाई में ईडी ने इस मामले में मीसा के चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश अग्रवाल के खिलाफ पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया था। एजेंसी ने जैन बंधुओं वीरेंद्र जैन और सुरेंद्र कुमार जैन सहित करीब 35 लोगों को आरोपित किया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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