कुंभ मेले में फिर लगी आग, बाल-बाल बचे लालजी टंडन

0
67

प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में देर रात एक कैंप में भीषण आग लगने से बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन बाल-बाल बच गए। बताते हैं कि जिस वक्त कैंप में आग लगी, उस समय लालजी टंडन गहरी नींद में सो रहे थे। हादसे में उनका मोबाइल, चश्मा, घड़ी और दूसरे सामान जल गए। आग लगने के बाद टंडन को बचाकर कुंभ मेले से सर्किट हाउस शिफ्ट किया गया। कुंभ मेले में आग लगने की यह पांचवीं घटना है।

आग बिजली के शार्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे में टेंट व अन्य सामान जलकर पूरी तरह खाक हो गया है। त्रिवेणी संकुल में आग रात करीब ढाई बजे आग लगने से टेंट सिटी में अफरा-तफरी का माहौल मच गया।

सीएफओ प्रमोद शर्मा ने बताया कि जिस टेंट में लालजी टंडन थे उसके बगल वाले कैंट में आग लगी थी और देखते-देखते आग लाल जी टंडन के कैंप तक पहुंच गई। मौके पर पहुंची दमकल कर्मी ने आग पर काबू पा लिया। आग कैसे और किन परिस्थितियों में लगी इसकी जांच की जा रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleवैलेंटाइन डे स्पेशल: आप भी इन ऐप्स की मदद से अपना दिन बना सकते है खास
Next articleवीवीएस लक्ष्मण की नजर में भारत और इंग्लैंड विश्व कप के दावेदार
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here