एलएसई में अभिनेता अनुपम खेर को सुखद अनुभव, जानिए इसके बारे में !

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आपको बता दे​ कि अभिनेता अनुपम खेर ने प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में व्याख्यान को विनीत करने वाला अनुभव करार दिया है। एलएसई द्वारा शनिवार को आयोजित एलएसई एसयू इंडिया फोरम 2018 में खेर को बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था।

अनुपम ने रविवार को ट्वीट कर कहा, “शिमला के एक छोटे से शहर का लड़का लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मुख्य वक्ता था। इस अवसर के लिए इंडिया फोरम के छात्रों का शुक्रिया। ईश्वर महान है, जिंदगी सुंदर है, विफलता की शक्ति, विनम्र बनाने वाला अहसास।”

उन्होंने लिखा, “बहुत ही ठंड है (लंदन में)। लेकिन, मैं अच्छे छात्रों से मिलने और उनसे बातचीत करने को लेकर आश्वस्त हूं जिसे माहौल में गर्मी बनेगी। वैसे, मुझे कभी भी 38 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त नहीं हुए।”

एलएसई में इसे पहले इकोनॉमिक फोरम फॉर इंडिया के नाम से जाना जाता था। ब्रिटेन में इसे अपने आप में इस तरह का एकमात्र सम्मेलन माना जाता है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में समकालीन भारत के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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