कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम नए मुख्य आर्थिक सलाहकार

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सरकार ने शुक्रवार को हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के एसोसिएट प्रोफेसर कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम को वित्त मंत्रालय में तीन सालों के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के पद पर नियुक्त किया है। अरविंद सुब्रह्मण्यम के जून में पद छोड़ने के बाद से पिछले छह महीनों से इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई थी।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने कहा कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने आईएसबी के कार्यकारी निदेशक (सेंटर फॉर एनालिटिकल फाइनेंस) कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्ण्यम को सीईए के पद पर नियुक्ति की मंजूरी दे दी है।

सुब्रह्मण्यम ने शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से पीएचडी (वित्तीय अर्थशास्त्र) की है और आईआईएम कोलकाता और आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र हैं। वह बैंकिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेस और आर्थिक नीति के विशेषज्ञ हैं।

आईएसबी की वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की कार्पोरेट गवर्नेस की विशेषज्ञ समितियों में और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेषज्ञ समितियों में अपनी सेवाएं दी है, जो उन्हें कॉपोर्रेट प्रशासन और बैंकिंग सुधारों के एक प्रमुख वास्तुकार के रूप में स्थापित करता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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