कोविड वैक्सीन : जायडस कैडिला ने क्लिनिकल ट्रायल का दूसरा चरण शुरू

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दवा बनाने वाली कंपनी जायडस कैडिला ने बुधवार को घोषणा की कि कोविड-19 से बचाव के लिए बनाई गई प्लाज्मिड डीएनए वैक्सीन ‘जायकोवी-डी’ का 6 अगस्त से अब दूसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण शुरू होगा। पहले चरण का क्लिनिकल परीक्षण हानिरहित और सहनीय रहा था। कंपनी ने कहा कि पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण में वैक्सीन की खुराक दिए जाने पर स्वयंसेवी स्वस्थ पाए गए। उन्होंने इस खुराक को अच्छी तरह सहन कर लिया। परीक्षण 15 जुलाई को शुरू हुआ था।

जायडस कैडिला के चेयरमैन पंकज आर. पटेल ने कहा, “हम अब दूसरे फेज का क्लीनिकल परीक्षण करने जा रहे हैं और वैक्सीन का एक बड़ी आबादी के लिए सुरक्षा एवं प्रतिरक्षाजनत्व की दृष्टि से मूल्यांकन करवाने की सोच रहे हैं।”

उनका यह बयान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक बलराम भार्गव के यह कहने के अगले दिन आया है कि “जायडस कैडिला ने डीएनए वैक्सीन के पहले चरण का ट्रायल पूरा कर लिया है और 11 जगह दूसरे चरण के परीक्षण में जुट गई है।”

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार, भारत में तीन वैक्सीन का विभिन्न चरणों में क्लिनिकल परीक्षण चल रहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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