कोविड-19 महामारी से ‘बहुत अधिक चकित’ नहीं हुए थे Jude Law

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अभिनेता जूड लॉ का कहना है कि वह कोविड -19 महामारी के कारण शॉक में नहीं थे, क्योंकि वह साल 2011 में रिलीज हुई फिल्म ‘कॉन्टेजियन’ के सेट पर विशेषज्ञों से बात करने के बाद जान चुके थे कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट आ सकता है।

फीमेल फस्र्ट डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट के अनुसार, लॉ ने जीक्यू मैगजीन से कहा, “जब 2020 शुरू हुआ और हमने सुना कि चीन में शुरुआत में क्या हुआ और कैसे यह दुनिया भर में तेजी से फैला, इससे खतरे की घंटी बजी। दुर्भाग्य से मुझे बहुत आश्चर्य नहीं हुआ।”

लॉ ने थ्रिलर फिल्म में एलन क्रमविडे की भूमिका निभाई थी और उन्होंने कहा कि फिल्म में काम करने के कारण उन्हें यह संभावना थी कि आगे ‘यह होने वाला है’।

उन्होंने कहा, “पहले ही समझ चुका था कि ऐसा होने वाला है। हमारे साथ सेट पर मौजूद महान वैज्ञानिक जिन्होंने स्कॉट (जेड. बर्न्‍स), लेखक और (निर्देशक) स्टीवन (सोडेरबर्ग) के साथ काम किया था, वे बहुत ही विद्वान और अनुभवी व्यक्ति थे जो जानते थे कि क्या उम्मीद की जा सकती है।”

उन्होंने कहा कि घटनाएं ‘बिल्कुल’ वैसे ही सामने आईं, जैसे विशेषज्ञों ने उन्हें सेट पर चेतावनी देते हुए बताया था।

अभिनेता ने कहा, “जिस तरह से उन्होंने इसका वर्णन किया, ठीक वैसा ही हो रहा है।”

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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