कोविड-19 : मिनर्वा अकादमी ने दिए पांच लाख रुपये

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कोरोनावायरस से लड़ाई में मिनर्वा अकादमी के मालिक रंजीत बजाज ने मदद का हाथ बढ़ाया है। बजाज ने चार अलग-अलग फंड में पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है।

बजाज ने पंजाब राज्य सरकार कोविड राहत कोष में एक लाख, हरियाणा कोरोना राहत कोष में एक लाख, प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दो लाख और इंडियन रेड क्रॉस सोसयटी में एक लाख रुपये देने क घोषणा की है।

बजाज ने कहा, “यह हर किसी के लिए मुश्किल समय है। एक राष्ट्र के तौर पर हम एक वैश्विक बीमारी से लड़ रहे हैं। एक पुरानी संस्था होन के नाते यह हमारा दायित्व है कि हम इस समुदाय और देश में इस लड़ाई में अपना योगदान दें। हमें उम्मीद है कि अन्य लोग भी इसमें आगे आएंगे।”

उन्होंने कहा, “इस समय, हम उन लोगों की मदद करना चाहते हैं जो हमारा जीवन आसान बना रहे हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि हम इससे बाहर निकल आएंगे।”

न्यूज स्त्रोत आईएएएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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