कोविड-19 प्रभाव : गूगल इस बार अप्रैल फूल नहीं मनाएग

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इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में शामिल लोगों के प्रति सम्मान दिखाते हुए इस साल अप्रैल फूल यानी मूर्ख दिवस न मनाने का फैसला लिया है। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल मार्केटिंग प्रमुख लोरेन टूहिल के एक आंतरिक ईमेल में कहा गया है कि गूगल 1 अप्रैल, 2020 को कोरोनोवायरस से लड़ने वालों के प्रति प्रत्यक्ष रूप से सम्मान प्रकट करेगा।

उन्होंने कहा, “हमने पहले ही इस बार अप्रैल फूल न मनाने का निर्देश दिया है, लेकिन हमने महसूस किया है कि टीमों के भीतर छोटी परियोजनाएं हो सकती हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता।”

दोहिल ने लिखा, “सुनिश्चित करें कि आपकी टीम आंतरिक या बाहरी रूप से किसी भी तरह का मजाक करने से बचेगी।”

गूगल आमतौर पर 1 अप्रैल को अपने विभिन्न प्लेटफार्मो पर ढेर सारी मजाकिया सामग्री पेश करता रहा है।

सर्च इंजन दिग्गज ने भी अपने लोकप्रिय डुओ चैट ऐप के एकल समूह में ग्रुप वीडियो उपयोगकर्ताओं की संख्या सीमा 8 से बढ़ाकर 12 कर दिया है, ताकि इससे अधिक लोग जुड़ें और उनके लिए ‘सोशल डिस्टेंस’ का अभ्यास करने में मदद मिल सके।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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