कोविड 19: एम्स के स्वास्थ्य कर्मचारी मांग रहे हैं रुकने के लिए घर

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एम्स के नसिर्ंग स्टाफ और अन्य हेल्थ वर्कर जो कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं वो इस वक्त एक अलग तरह की परेशानी से गुजर रहे हैं और वह है समाज में उनके साथ किया जा रहा भेदभाव का बर्ताव। अब समाज के लोग उनसे बातें नहीं करते और कटने लगे हैं। यही वजह है कि वे अब काम के बाद रहने के घर की व्यवस्था किए जाने की मांग कर रहे हैं।

सभी नसिर्ंग स्टाफ और डॉक्टरों के जहन में एक बात जो बार बार परेशान कर रही है वो ये कि कोरोना वायरस के डर की वजह से उनके साथ भेदभाव भी होने लगा है।

जहां पूरी दुनिया इस वक्त डॉक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सभी लोगों को सलाम कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उनकी हौसला अफजाई भी कर रहे हैं लेकिन कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहे लोगों के जहन में एक डर भी बना हुआ है कि उनकी वजह से उनके परिवार को कुछ न हो जाए।

दिल्ली के एम्स अस्पताल में नरसिंग ऑफीसर कनिष्क यादव ने आईएएनएस से कहा कि उन्होंने एम्स के मेडीकल सुप्रिटेंडेंट को 30 तरीख को एप्लिकेशन लिख कर गुजारिश की थी कि उन्हें भी एम्स के ट्रामा सेंटर में लगाया जाए जिससे वो भी इस लड़ाई में शामिल हो सकें।

कनिष्क ने बताया, “फिलहाल हमें सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं लेकिन हम एम्स की तरफ से चाहते है कि हमें रहने के लिये घर दिया जाये। अभी हम जब घर जाते हैं तो परिवार के सभी सदस्य परेशान हो जाते हैं उनको लगता है कि मैं कोरोना वायरस के मरीजों के साथ रहता हूं तो कहीं हमे न इसकी वजह से हो जाये।”

उन्होंने कहा कि हमारे कुछ सहयोगियों के साथ तो भेदभाव होने लगा है उनकी सोसाइटी में लोग दूर भाग रहे हैं, बात करना छोड़ दिया है। उनके साथ हमें बड़ी अजीब नजरों से देखा जाने लगा है, कुछ सोसायटी में तो उनकी एसोसिएशन ने अलग से एक कमरा दे दिया है रहने को।”

कनिष्क ने बताया, “इस वक्त मैं एम्स के ट्रॉमा सेंटर जहां कोविड 19 का आईसीयू है उसमें काम कर रहा हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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