कई बॉलीवुड फिल्म में काम कर चुकी ये अभिनेत्री नहीं देखती हिंदी फिल्में

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मशहूर अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा एक शादार अदाकारा हैं। कोंकणा सेन शर्मा शॉर्ट फिल्म ‘अ मॉनसून डेट’ में ट्रांसजेंडर की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। कोंकणा ने अपने अभिनय करियर के दौरान एक से एक बेहतरीन फिल्मों में काम किया है। कोंकणा सेन शर्मा ने बॉलीवुड की फिल्मों में काम किया है लेकिन उनकी हिंदी फिल्मों में ज्यादा रुचि नहीं हैं। हाल ही में उन्होंने एक बातचीत में खुलासा किया हैं। एनबीटी से बातचीत में उन्होंने कई सारी बाते की।

मेनस्ट्रीम कलाकार पहले इस तरह की भूमिकाएं करने से हिचकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। इस बदलाव की क्या वजह मानती हैं?
हर किसी को इवॉल्व होना होता है। आप जैसे 100 साल पहले रहते थे, वैसे हमेशा नहीं रह सकते। मुझे लगता है कि अब अवेयरनेस और एजुकेशन बढ़ी है, इसलिए लोग भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। पहले बहुत-सी ऐसी चीजें थीं, सती प्रथा भी थी, औरतों को वोट का हक नहीं था, लेकिन लोग उससे आगे बढ़े न। अपनी परंपराओं और पुरानी सोच की कमियों को देखा और उससे आगे बढ़े। समाज के साथ खुद को अडॉप्ट किया, तो हमारी सोच समय के साथ बदलती है, क्योंकि आखिरकार हम इंसान हैं। हम इकलौती ऐसे प्रजाति हैं, जो उनके लिए भी आवाज उठाते हैं, जिनकी खुद की आवाज नहीं होती या उनकी जिनकी आवाज इतनी मजबूत नहीं है। हम अब स्पेशल जरूरतों वाले बच्चों को जंगलों में नहीं छोड़ देते। हम पहले यह भी करते थे। पहले हम बहुत सी छोटी-बड़ी अमानवीय चीजें करते थे, लेकिन अब हम वे चीजें नहीं करते, क्योंकि हम भी एक समाज के तौर पर इवॉल्व हो रहे हैं, बेहतर हो रहे हैं। हम ज्यादा जागरूक, ज्यादा एजुकेटेड और शायद ज्यादा दयालु हुए हैं।

आपके यह रोल चुनने की क्या वजह रही?
सबसे बड़ी वजह तो यह रही कि मुझे यह कहानी बहुत अच्छी लगी। मुझे इस कॉन्सेप्ट और स्टोरी से प्यार हो गया। मैंने कभी पहले ऐसा रोल किया नहीं था। मेरे लिए यह दिल को छू लेने वाली स्टोरी रही, तो जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो पढ़ते ही इसे करने के लिए तैयार हो गई। यह इतनी बारीकी और खूबसूरती से लिखी गई है।

इस किरदार के लिए क्या तैयारी करनी पड़ी?
जब फिल्म शुरू होती है, तो मेरा किरदार ऑलरेडी एक औरत बन चुकी है। वह एक लड़के के रूप में पैदा हुई थी। हममें से ज्यादातर लोग खुशकिस्मत हैं कि हम उस शरीर के साथ खुश रहते हैं, जो हमें जन्म से मिली है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि वे गलत शरीर में फंसे हुए हैं। यह किरदार भी ऐसा ही है। पहले लोग इस बारे में ज्यादा नहीं जानते थे। यहां तक कि पहले इसे बीमारी मानते थे। तब इसके बारे में ज्यादा रिसर्च नहीं थी, लेकिन हम इसके बारे में जानते हैं। हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने भी ये कहा है कि ट्रांसजेंडर होना कोई मेंटल बीमारी नहीं है। इस रोल को निभाते वक्त मेरा चैलेंज यह था कि औरत बनने से पहले उसका क्या अनुभव रहा होगा? क्या जर्नी रही होगी? कैसी सर्जरी से गुजरी होगी? इस सबको लेकर मैंने डायरेक्टर तनूजा चंद्रा और राइटर गजल धालीवाल के साथ काफी डिस्कस किया और थोड़ा-बहुत रिसर्च किया।

आपको लगता है कि हमारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री भी समय के साथ काफी इवॉल्व हुई है और अब हर तरह की फिल्में बन रही हैं?
मुझे नहीं पता। मैं उम्मीद करती हूं कि ऐसा हो रहा है। लोग मुझसे यह सवाल पूछते रहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं सारी फिल्में देखती हूं। मेरा मानना है कि हर साल कुछ अच्छी फिल्में बनती हैं, मेनस्ट्रीम में भी और दूसरी किस्म की भी। मैं उम्मीद करती हूं कि चीजें बदल रही हों, लेकिन मेरे हिसाब से मैं इस सवाल के लिए सही इंसान नहीं हूं। मैं इंडस्ट्री ट्रेंड्स में बिलकुल भी इंट्रेस्टेड नहीं हूं। मैं ज्यादा हिंदी फिल्में देखती नहीं हूं, न ही मुझे पता है और सच कहूं तो मुझे परवाह भी नहीं है। मैं सिर्फ खुद इंट्रेस्टिंग काम करने की कोशिश करती हूं पर मैं उम्मीद करती हूं कि इंडस्ट्री बेहतर के लिए बदल रही हो।

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