कोलकाता नाइट राइडर्स प्रशंसक ने कमिंस को दी 2015 की जर्सी

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के आगामी सीजन में सबसे महंगे खिलाड़ी बने आस्ट्रेलिया के पैट कमिंस को भारत दौरे पर आने पर फ्रेंचाइजी के एक प्रशंसक ने 2015 आईपीएल की जर्सी भेंट में दी है। कमिंक को कोलकाता ने इस साल 15.5 करोड़ रुपये में खरीदा है। वह आईपीएल इतिहास में सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी बन गए हैं।

कमिंस इससे पहले भी कोलकाता के लिए खेल चुके हैं। प्रशंसक ने 2015 की फ्रेंचाइजी की वो जर्सी कमिंस को तोहेफ में दी है जिस पर उनका नाम लिखा है। कमिंस 2014 और 2015 में कोलकाता के लिए खेल चुके हैं।

कमिंस ने कहा, “मैं यहां भारत आकर खुश हूं। मैं यहां एक प्रशंसक से मिला जिसने मुझे कोलकाता की 2015 की जर्सी तोहेफे में दी। इसने पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। मैं आने वाले सीजन के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।”

उन्होंने कहा, “ईडन गार्डन्स की मेरे पास कुछ यादें हैं। बच्चे के तौर पर मैंने यहां काफी क्रिकेट देखी है। मुझे यह स्टेडियम बेहद पसंद है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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