नागा साधु संयासी के शाही स्नान में छिपा है ये गहरा रहस्य, जानकर आप हो जायेगें हैरान

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जयपुर। प्रयाग राज का कुंभ का आगाज 15 जनवरी से होने वाला हैं। 15 जनवरी से 4 मार्च तक प्रयागराज में कुंभ की धूम रहेगी। कुंभ में देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। कुंभ के समय शहर का नजारा ही अलग होता है।

कुंभ की शान माने जाने वाले साधु सन्यासी जब अपने अपने अखाडों के साथ शाही स्नान के लिए आते हैं, कुंभ के समय पूरे देश से 13 अखाड़े सम्मिलित होते हैं। कुंभ के समय जब साधु संयासी शाही स्नान करने के  लिए निकलते हैं तो उस समय साधु संयासी के शाही स्नान के लिए जाते समय एक राजपथ बनाया जाता है जिससे होकर स्नान के लिए संगम पर जाते हैं।

कुंभ में जब शंकराचार्य की सेना माने जाने वाले ये अखाड़े अपने पूरे दल-बल के साथ व घोड़े, हाथी और रथों में सवार होकर निकलते हैं तो उस समय इनका वैभव देखते ही बनता है। इसको देखना वाकई में एक यादगार अनुभव होता हैं।

कुंभ की शान को देश ही नहीं विदेशी भी अपने अपने कैमरे में कैद करते हैं। कुंभ के शादी स्नान में सोने-चांदी के सिंहासनों पर सवार होकर महामंडलेश्वरों और तलवारबाजी करते नागा साधुओं के करतबों को हर कोई दांतों तले उंगली दबाने में मजबूर होते हैं।

प्रयागराज कुंभ का पहला शाही स्नान मकर संक्रांति के दिन होने वाला है, इस दिन से मकर संक्राति के दिन से ही कुंभ का आगाज हो रहा है। इसी शाही स्नान से ही कुंभ मेले का पूरी विधि-विधान से शुरुआत किया जाएंगा। शाही स्नान के बाद भगवान सूर्य को चावल और तिल का दान दिया जाता है।

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