लडकियों के प्राइवेट पार्ट का रंग काला होने के इस कारण को जानकर, लड़के हो जाएगे पागल…

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दोस्तों, आपको बता दें कि शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में इंसानों के प्राइपेट पार्ट का रंग ​थोड़ा गहरा होता है । यानी कालापेन लिए होता हैं । मगर क्या आप जानते है कि आखिर महिलाओं प्राइवेट पार्ट का रंग काला क्यों होता है य​दि नहीं तो आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं ।

शरीर के जिस हिस्से को आप ढंकते हैं वह गोरा हो जाता है। मगर प्राइवेट पार्ट के साथ ऐसा नहीं होता है । हम लोग इस हिस्से को ढंक कर रहते हैं मगर फिर भी यह हिस्सा काला होता हैं । आपको बता दें कि, प्राइवेट पार्ट्स में लगातार नमी बनी हुई रहती है उसका मुख्य कारण पसीना होता हैं । आपको जानकर हैरानी होगी कि, शायद ही कोई इंसान ऐसा होगा जो कि बार-बार प्राइवेट पार्ट्स पर आए हुए पसीने को साफ करता होगा।

कई लेयर्स से ढका होने के कारण यहां पर हवा नहीं पंहुच पाती और यहीं कारण है कि मनुष्य की त्वचा की बनावट और उसका रंग बदलने लगता है।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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