जानिए, आखिर छोटी दिवाली को क्यों कहा जाता है नरक चतुर्दशी

0
94

जयपुर। छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन को नरक चतुर्दशी करने के लिए मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था जिस कारण से इसका नाम नरक चतुर्दशी पड़ा। इसके साथ ही नरक चतुर्दशी के दिन के लिए माना जाता है कि इस दिन विधानपूर्वक पूजा करने से नर्क से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है यानि मृत्यु के बाद नरक नहीं जाना पड़ता।

श्रीमद् भागवत के अनुसार नरकासुर नाम का एक राक्षस था जो बड़ा ही पराक्रमी था। नरकासुर राक्षस भूमि से उत्पन्न हुआ था लेकिन आकाश में विचरण करता था आकाश में ही नगर बनाकर वहां रहता था। नरकासुर ने देवताओं से भांति-भांति के रत्न ऐरावत हाथी, श्रवा घोड़ा, कुबेर के मणि व माणिक्य तथा पद्मनिधि नामक शंख इन सभी को छीन कर अपने पास रख लिया था।

नरकासुर से परेशान हो कर इंद्र और अन्य देवता अपनी सहायता के लिए भगवान श्री कृष्ण के पास गये और उनको नरकासुर के बारे में बताया। इसके बाद भगवान कृष्ण गरुड़ पर सवार होकर नरकासुर की नगरी गये। वहां उन्होंने राक्षसों का वध कर पांचजन्य शंख बजाया जिसके बाद नरकासुर दिव्य रथ पर सवार होकर भगवान से युद्ध करने के लिए आया। नरकासुर और भगवान कृष्ण के बीच घमासान युद्ध हुआ, भगवान ने नरकासुर की छाती पर दिव्य शस्त्र से प्रहार कर उसे धरती पर गिरा दिया।

ऐसे में भूमि की प्रार्थना पर भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर के पास जाकर उससे वर मांगने को कहा। ऐसे में नरकासुर ने कहा कि जो मनुष्य मेरी मृत्यु के दिन मांगलिक स्नान करेगा उसे नरक की  यातना नहीं झेलनी पडेंगी। इसके बाद भगवान ने नरकासुर की कैद से 16000 कन्याओं को छुडाया था। नरकासुर की मृत्यु की खुशी में दीवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीवाली मनाई जाती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here