जानें क्या है उदयपुर के सास बहु मंदिर की कहानी

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भारत देश के हर राज्य के हर शहर में लोगों ने अपने अपने धर्मो और विश्वासों के अनुसार बहुत से मंदिरों की स्थापना कर रखी है| हर मंदिर की अपनी एक अलग कहानी है और हर मंदिर से लोगों के जुड़े अपने अलग अलग विश्वास है| कहीं कोई मंदिर मन्नतें पूरी करने के लिए जाना जाता है और वहीँ कोई मंदिर अपनी प्राचीनता के लिए जाना जाता है और इन्ही अनेकों मंदिरों में से एक है उदयपुर का सास बहु मंदिर| सास बहु मंदिर का नाम जितना दिलचस्प और अनोखा है उतनी ही दिलचस्प और अनोखी उसकी कहानी भी है| तो आइये जानते हैं मंदिर से जुडी इन अनोखी बातों के बारे में|

 

ये मंदिर उदयपुर से 23 किलोमीटर दूर नागदा गाँव में स्थित है और इस मंदिर को भगवान् विष्णु को अर्पित किया गया है| इतिहास के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कच्छवाहा वंश के राजा महिपाल ने अपनी पत्नी के लिए कराया था क्योंकि उनकी पत्नी विष्णु भक्त थी| इस मंदिर के निर्माण के बाद राजा महिपाल ने इसे सहस्त्रबाहु नाम दिया था| कुछ समय बाद राजा महिपाल के पुत्र का विवाह हुआ और क्योंकि उनकी पुत्रवधु शिव भक्त थी इसलिए उन्होंने उस मंदिर के पास ही शिव मंदिर का निर्माण भी करा दिया था|

इस मंदिर में पहले भगवान् विष्णु की स्थापना की गयी थी और क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान् विष्णु की हज़ार भुजाएं हैं इसीलिए इस मंदिर का नाम सहस्त्रबाहु रखा गया था पर पुत्रवधु के आने के बाद सास बहु उस मंदिर में मिलकर पूजा अर्चना किया करती थी इसलिए और लोगों के गलत उच्चारण के कारण इसे बाद में सास बहु मंदिर कहा जाने लगा| इस मंदिर का निर्माण लगभग 1100 साल पहले कराया गया था और इस मंदिर को बहुत ही आकर्षक तरीके से बनवाया गया था जिसमे बहु की मंदिर की छत  को अष्टकोणीय आठ नक्काशीदार महिलाओं से सजाया गया था और मंदिर की दीवारों को रामायण की अनेकों घटनाओं से सजाया गया था| बहु का मंदिर सास के मंदिर से थोड़ा छोटा है| मंदिर के एक मंच पर भगवान ब्रम्हा, शिव और विष्णु की छवियां खुदी हैं और दूसरे मंच पर श्री कृष्ण, बलराम और परशुराम की छवि खुदी हुई है|

इस मंदिर की कहानी के कुछ और भी दिलचस्प किस्से हैं जिसमे से एक यह है की जब मुगलों ने दुर्ग पर कब्ज़ा किया था तो इस मंदिर की करीगरियों को तहस नहस कर रेत से बंद करवा दिया था लेकिन 19वीं सदी में जब ब्रिटिशों ने दुर्ग पर कब्ज़ा किया तो उन्होंने वापस से इस मंदिर को आम लोगों के लिए खुलवा दिया था|

तो इतनी सारी दिलचस्प कहानियों को समेटे ये मंदिर सभी भक्तों की भक्ति को स्वीकार करता आज भी नागदा गांव की शान को बढ़ा रहा है|

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