जानिए चिकित्सकों के अनुसार वर्जेनिटी की पहचान करने का सही तरीक़ा, लड़के जरूर पढ़े

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जयपुर, कौमार्य एक ऐसा विवाद है जो सदियों से चला आ रहा हैं। जिसकी वजह से कई रिश्ते बिगड़े है। हालांकि 21 वीं सदी के आधुनिक दौर में इस पर कम ध्यान दिया जाने लगा है। हमारे देश में आज भी लडकियों कि वर्जेनिटी को उनके चरीत्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। लोगों की मानसिकता मे अभी भी कोई खास परिवर्तन नहीं आया है। लोग वर्जेनिटी की जांच करने को लेकर खोजबीन करते रहते है।Image result for वर्जेनिटी चेकअप
आज हम आपको बताते है वर्जेनिटी क्या है। दरअसल यह एख परमीएबल हाइमन झिल्ली होती है। किसी लड़की में यह झिल्ली सही होती है तो उसे वर्जिन माना जाता है। इसके फट जाने पर लड़की की वर्जेनिटी खत्म होना माना जाता है। हमारे समाज में इस झिल्ली के नष्ट होनें को लड़की के चरित्र के साथ जोड़ दिया जाता है। हालांकि यह कुरीती वर्षों से चली आ रही है। जबकि इसके विपरित चिकित्सकों का मानना है कि हाइमन झिल्ली नष्ट होनें का मतलब यह नहीं है कि लड़की ने यौन संबंध बनाए है।Related image
इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि संबंध बनाते समय लड़की के रक्त स्त्राव होना जरूरी नहीं है। क्योंकि आजकल महिलाएं घर के अलावा बाहर के काम भी करती है खेल कूदों में भी भाग लेती है। साथ ही साइकिल चलाने जैसे काम भी करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 90 प्रतिशत साइकिल चलाने वाली, डांस करने वाली लड़कियों की हाइमन झिल्ली फट जाती है।Image result for वर्जेनिटी चेकअप
इसलिए किसी महिला या फिर लड़की के साथ संबंध बनाते समय इस बात पर कभी भी गौर नहीं करे कि उसके रक्त स्त्राव हुआ है या नहीं। अधूरे ज्ञान के चलते किसी महिला के चरीत्र पर अंगुली उठाना या फिर उस चरीत्रहीन का प्रमाण पत्र देना सही नहीं है।

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