क्रिकेट इतिहास के चुनिंदा भावुक पल, जब फैंस से लेकर दिग्गजों की आखें में तक थे आंसू

वैसे तो क्रिकेट के दुनिया में कई ऐसे पल रहे हैं जो हमेशा के लिए यागदार हैं। पर यहां कुछ चुनिंदा भावुक पलों  के बारे में बताने जा रहे हैं।

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जयपुर (स्पोर्ट्स  डेस्क)।वैसे तो क्रिकेट के दुनिया में कई ऐसे पल रहे हैं जो हमेशा के लिए यागदार हैं। पर यहां कुछ चुनिंदा भावुक पलों  के बारे में बताने जा रहे हैं।

तेंदुलकर का आख़री मैच-

 सचिन तेंदुलकर की लोकप्रियता कितनी ज्यादा रही है हम सभी जानते हैं। और इसलिए उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है । सचिन के क्रिकेट करियर करियर का सबसे भावुक पल जब, उन्होंने आखिरी मैच खत्म होने के बाद पिच की और बढ़े और नम आखों के साथ हाथ लगाया तब इस दृश्य को देखकर स्टेडियम में मौजूद सभी लोग रोने लगे। वह वक्त ऐसा था जब शायद ही कोई ऐसा हो जो भावुक ना हुआ हो।

एमएस धोनी विश्व कप सेमीफाइनल ,2015 –  हम सभी जानते हैं कि एमएस धोनी कभी मैदान पर अपनी भावनाएं जाहिर नहीं करते। पर 2015 के विश्वकप फाइनल में जब भारत, ऑस्ट्रेलिया से सेमीफाइनल में हार गया था। तब साक्षात्कार देते हुए धोनी के आंसू छलक उठे थे।

पाकिस्तान vs अफगानिस्तान, एशिया कप (2018) –

एशिया कप 2018 में अफगानिस्तान ने अपने प्रदर्शन से सभी ध्यान आकर्षित किया । वह इस टूर्नामेंट में सुपर चार के मुकाबले तक पहुंची। यह पहले मैच में पाकिस्तान के साथ खेल रही अफगानिस्तान लगभग जीत हो चुकी थी । पर आखिरी ओवर में आफताब आलम दस रन नहीं बचा सके। शोएब मलिक ने शुरुआती 3 गेंदों में ही दस रन बनाकर पाकिस्तान को जीत दिला दी। पर यहां यह गेंदबाज अपने आंसूओं को रोक नहीं पाया और मैदान में रोने लगा।

दक्षिण अफ्रीका vs ऑस्ट्रेलिया, विश्वकप सेमी फाइनल (1999)-

रोमांचक मैच क्रिकेट का सही मायनो में कोई राह तो वह 1999 का सेमीफाइनल जो ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के बीच हुआ । लांस क्लूजनर ने अकेले के दम पर मैच को जीताही दिया था जहां 3 गेंदों में सिर्फ 1 रन चाहिए था। तभी लांस क्लूजनर और एनल डोनॉल्ड ने एक गलती कर दी और 1 रन चुराने के चक्कर में रन आउट हो गए।

 भारत vs श्रीलंका, विश्वकप सेमी फाइनल (1996)-

बता दें की   1996 का विश्व कप जो भारत के लिए अच्छा नहीं रहा था। बता दें की  सेमी फाइनल में 251 रनों का पीछा कर रही भारत ने एक समय 98 रनों पर 1 विकेट पर पहुंची । पर अगले 22 रनों पर ही भारत ने 8 विकेट खोए और  मफिर मैदान  में मौजूद लोगों से यह देखा नहीं गया और उन्होंने खिलाड़ियों की ओर बोतल फेंकना शुरू किया । मैच रेफरी क्लाइव लॉयड ने मैच को फौरन ही रुकवा कर  श्रीलंका टीम को विजेता घोषित कर दिया।

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