जानिए कार में सामान्य इंजन और टर्बो चार्ज्ड इंजन में कितना है अंतर..?

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जयपुर। पिछले करीब 15 सालों में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में काफी बदलाव हुआ है। अब कारों में कंपनियां नए-नए तकनीक का इस्तेमाल करने लगे है। वाहनों में जहां कुछ सालों पहले तक सामान्य इंजन का प्रयोग किया जाता था वी अब टर्बो चार्ज्ड इंजन का इस्तेमाल किया जाने लगा है। अब यह इंजन दुनिया भर के कई वाहन निर्माता धडल्ले से इस इंजन का प्रयोग कर रहे हैं।

आज हम आपको सामान्य इंजन और टर्बो चार्ज्ड इंजन के बीच अंतर बताने जा रहे है। एक सामान्य इंजन और टर्बो चार्ज्ड इंजन दोनों में कुछ ऐसी फैक्टर होते हैं जो एक समान होते हैं। चाहे वो सुपर चार्ज्ड इंजन हो, टर्बो चार्ज्ड इंजन हो या फिर सामान्य इंजन ये तीनो ही गैसोलिन से चलते है।

आपको बता दें कि टर्बोचार्जिंग तकनीक में कुछ भी नया नहीं है। दरअसल यह तकनीक सदियों से हमारे बीच में है। आपको बता दें कि देश में  हाल के दिनों में ये तेजी से विकसित हुआ है और इसका प्रयोग किया जाने लगा है। आज के समय में होंडा ने भी अपने सिडान कारों में टर्बो चार्ज्ड इंजन का प्रयोग करना शुरू कर दिया है।  आपको बता दें कि टर्बो चार्ज्ड इंजन के वेट का कम किए बिना इसके आउटपुट पावर को बढ़ाता है।

दरअसल टर्बो चार्ज्ड एक ऐसी तकनीक वह तकनीक है  जिसकी मदद से इंजन के भीतर हवा के दबाव को बढ़ाया जाता है। इंजन के चेंबर में हवा को और भी ज्यादा दबाने का मतलब ये होता है कि चेंबर में फ्यूल के लिए और भी ज्यादा जगह मिलती है। किसी भी इंजन में ज्यादा फ्यूल जाने का मतलब होता है  ज्यादा उर्जा का उत्पन्न होना।

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