अंतरिक्ष में अगर कोई दुर्घटना हुई तो इसरो के द्वारा लॉन्च किया गया ये कैप्सूल कैसे बचाएगा जान?

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जयपुर। अंतरिक्ष में स्पेस वाहन भेजने का सिलसिला 70 के दशक से चलता आ रहा है। स्पेस पर वैज्ञानिक और इंजीनियर रिसर्च करने के लिए जाते रहते हैं। लेकिन उनकी सुरक्षा का डर भी बना रहता है।

असामान्य मौसम, रॉकेट में आई कोई भी खराबी जैसी कई घटनाएं हैं, जिससे कि अंतरिक्ष में आने जाने वाले यात्रियों को कई दफा जान का जोखिम भी उठाना पड़ा। भारतीय मूल की कल्पना चावला के साथ भी ऐसी ही घटना हुई थी, जिस वजह से उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

लेकिन अब इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन ने एक ऐसा कैप्सूल बनाया है, जिसकी मदद से अंतरिक्ष यात्री अपनी जान बचा सकेंगे। किसी भी तरह की दुर्घटना में ये कैप्सूल अंतरिक्ष यात्रियों की मदद करेगा।

कैसे किया गया परीक्षण?

5 जुलाई की सुबह 7 बजे इसरो ने श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से एक स्पेसक्राफ्ट भेजा। इसमें कोई इंसान मौजूद नहीं था बल्कि 12.6 टन का भारी मॉड्यूल्स और उसके साथ कैप्सूल मौजूद था। ये टेस्ट करीब 259 सेकंड का था। टेस्ट शुरु होने के कुछ देर के बाद ये बंगाल की खाड़ी में गिरा और पानी में कुछ देर दूरी तय करने के बाद वापस से श्रीहरिकोटा पहुंच गया।

कैसे करेगा काम?

इसरो के मुताबिक इस कैप्सूल को स्पेस फ्लाइट के साथ जोड़ कर भेजा जाएगा। किसी भी तरह का हादसा होने पर ये कैप्सूल स्पेसक्राफ्ट से अलग हो जाएगा और पैराशूट के ज़रिये पानी या ज़मीन तक पहुंच जाएगा।

इसके बारे में इसरो के चेयरमैन के. सीवान ने बताया..

क्रू बेलआउट सिस्टम पर कैप्सूल परीक्षण का प्रयोग किया गया और ये पूरी तरह से सफल रहा। इसके लिए किसी आदमी की जगह पर क्रू मॉडल का प्रयोग किया गया था। मॉडल कैप्सूल में अटैच किया गया था और इसे रॉकेट इंजन से जोड़ा गया। लॉन्च के कुछ देर बाद पैराशूट भेजा गया और कैप्सूल सुरक्षित तरीके से समुद्र में निर्धारित स्थान पर उतर गया।

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