आखिर कौन हैं ये बिश्नोई जिसने सुपरस्टार सलमान खान को करवा दिया जेल में कैद

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जयपुर। काला हिरण शिकार मामले में फिल्म अभिनेता सुपरस्टार सलमान खान को जोधपुर की अदालत ने सलमान खान को दोषी करार दे दिया है। सलमान खान के अलावा बाकी आरोपी सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू, नीलिमा कोठारी को अदालत ने इस मामले में निर्दोष करार दे दिया है। इसके साथ ही सलमान खान को इस मामले में सज़ा भी दे दी गई है। सलमान खान को इस मामले में अदालत ने 5 साल की सज़ा सुना दी है। इसके साथ ही उनपर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। 5 साल की सज़ा सुनाए जाने के बाद आज रात तक के लिए सलमान खान को जेल में कैद रहना होगा। इसके बाद उन्हें कल तक ज़मानत मिल सकती है।

लेकिन सवाल ये उठता है कि कि शिकार तो सब करते हैं लेकिन सलमान खान का मामला इतना ज़्यादा संगीन कैसे हो गया?

बिश्नोई समाज

बिश्नोई समाज के लोग सिर्फ रेगिस्तान में ही नहीं मिलते हैं। बिश्नोई राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी रहते हैं। ये लोग जंगली जानवरों और जंगल के रक्षक माने जाते हैं। जब सलमान खान के काले हिरण शिकार का मामला आया था तब ये लोग सड़कों पर आ गए थे और सलमान खान को सज़ा दिलाने के लिए 20 सालों से मांग करते आ रहे थे। बिश्नोई समाज के लोग आराध्य गुरु जम्भेश्वर के नियमों का पालन करते हैं जिसमें जानवरों की रक्षा और वन्य जीव को सुरक्षित रखना एक है।

जोधपुर के सांसद रहे जसवंत सिंह बिश्नोई ने बीबीसी को जो बताया उसके मुताबिक बिश्नोई समाज के संस्थापक जम्भेश्वर जी ने जीव-जन्तु और जंगलों की रक्षा का उपदेश दिया था। राजा-महाराजाओं के दौर में भी बिश्नोई समाज के लोग जंगलों और वन्य जीवों के लिए लड़ाई लड़ते थे। 1787 में जब राजा अभय सिंह ने जोधपुर रियासत में जंगलों को काटने का आदेश दिया था तब इस समाज ने विरोध प्रदर्शन करना शुरु कर दिया था। इस समाज ने उस समय इस हद तक विरोध किया था कि अगर सर काटकर भी जंगल बच जाए तो भला है।

उस समय बिश्नोई समाज ने इतना विरोध किया कि 365 लोगों की जानें चली गईं जिसमें 111 महिलाएं भी शामिल थीं। इस समाज की अमृता देवी पहली महिला थी जिन्होंने राजा के आदेश को मानने से इंकार कर दिया था। इसकी याद में हर साल खेजड़ली में मेला का आयोजन किया जाता है, जिसमें वन्य जीवों की रक्षा का प्रण लिया जाता है।

गुरु जम्भेश्वर जी को बिश्नोई समाज विष्णु भगवान के अवतार के रूप में मानते हैं। उनका जन्म 1451 में हुआ था। बिकानेर में समरथल बिश्नोई समाज का तीर्थ स्थल है, जहां बिश्नोई समाज के गुरु गुरु जम्भेश्वर जी का जन्म स्थल है।1487 में जब ज़बर्दस्त सूखा पड़ा था तो जम्भेश्वर जी ने लोगों की बड़ी सेवा की थी। उस वक्त जाट समुदायों ने बड़ी तादाद में बिश्नोई धर्म अपना लिया था।

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