जानिए ऐसे गांव के बारे में, जहां कोई इंसान नहीं, रहती है चुडैलें !

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दोस्तों, आज तक हमने भूत और चुडैलों के बारे में केवल कहानियों और किताबों में ही सुना था । मगर कया हो जब पूरा का पूरा गांव ही चुडैलों का हो और वहां पर कोई भी इंसान रहता हो। सुनकर ही हम लोग डर जाते हैं मगर आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर कोई इंसान नहीं बल्कि चुड़ैलें रहती है । तो आइए जानते है इसके बारे में ।

आज हम आपको जिस जगह के बारे में बताने जा रहे है वो अफ्रीका के घाना में हैं जो कि चुडैलों के गांव के नाम से मशहूर है। बताया जा रहा है कि जहां वो महिलाएं रहती है जिन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है। आपको बता दें कि यहां पर करीब 1500 महिलाएं रहती है जिनको की परिवार से निकाल दिया गया है।

आपको बता दें कि चुडैलों के इस गांव में ये महिलाएं झोपड़ियां बनाकर रहती हैं और अपना पेट पालने के लिए आस पास के खेतों में काम करती है। दरअसल, आपको बता दें कि एक अंधविश्वास के कारण इस गांव की महिलाओं को चुड़ैल घोषित कर दिया जाता है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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