जानिए शाहजहाँ की सबसे पहली पुत्री की कब्र के बारें में

0
88

जयपुर। अखिलेश चंद्र दक्षिण से एक कब्र है हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह। यह जगह लेट्टिस सार्बल्स से घिरी हुई हैं। यहां पर दिवारों के नाम पर सिर्फ पर्दे हैं। और यहां पर छत का कोई नामोनिशान नहीं हैं। हम ऐसा नहीं कह सकते हैं कि यहां पर किसी राजसी इंसान को दफनाया जा सकता हैं। कब्र के ऊपर लिखा है – ‘हरी घास के अलाव मेरी कब्र को किसी भी चीज से ढंका नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इस गरीब व्यक्ति की कब्र को ढकने के लिए सिर्फ घास ही काफी है।’ यह कब्र मुगल रानी जहानरा की हैं। मुगल सम्राट शाहजहाँ और मुमताज महल की सबसे बड़ी बेटी।

उस समय में जहानरा की मदद के बीना कोई चीज मुमकिन ही नहीं थी। बहुत सुंदर, धनी और प्रेमी लेकिन, खुद के लिए, उन्होंने एक महान मकबरे का निर्माण नहीं किया। यह राजसी रानी जो कि सूफी खयालात की थी उन्होंने अपनी कब्र की जगह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के पास चुनी। रहानरा नें ही चांदनी चौक का निर्माण किया।

जहानरा का जन्म सन् 1614 मे हुआ था। माँ की मृत्यु के बाद, केवल 17 साल की उम्र में, जायरा को पडशाह बेगम बना दिया गया, जो किसी भी महिला के लिए सर्वोच्च पद था। पडशाह बेगम यानी मुगल साम्राज्य की पहली महिला। 1658 में शाहजहाँ ने अपनी राजधानी आगरा स दिल्ली कर ली।

सन् 1657 में साहजहाँ काफी ज्यादा बीमार थे और औरंगजेब ने उन्हें जेल में डाल दिया। जहानरा ने अपने पिता के साथ ही रहन का फैसला किया और उनहोनें अपने पिता की देखभाल की। जहानरा ने उम्रभर शादी नहीं की। सन् 1681 में जहानरा की 67 की उम्र में मृत्यू हो गई।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here