नौ दिन देवी की पूजा करने के बाद कन्या पूजन में लोग अक्सर करते हैं ये गलती

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जयपुर। शास्त्रों में माना जाता है कि अगर नवरात्रि में नौ दिन देवी की पूजा कर रहें हैं तो पूजा तब तक सफल नहीं होती जब तक कन्या पूजन नहीं किया जाता। कन्या पूजन करने से नवरात्रि में किये देवी पूजन का शुभ फल मिलता है। कन्या पूजन करने से व्यक्ति के जीवन की सारी परेशानी दूर होती है। इसके साथ ही कन्या पूजन करने से देवी प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामना पूरी कर देती हैं ।

लेकिन हम में से कई लोगो को कन्या पूजन के लिए किस उम्र की कन्या का पूजन करना चाहिए इस बारे में पता नहीं होता। इसके साथ ही कन्याओं को क्या भोजन कराया जाएं और दान में क्या दिया जाए। इसके बारे में सही जानकारी नहीं होती। कई लोग किसी भी उम्र की कुंवारी कन्या का पूजन कर देते है, ऐसा करने से नौ दिनों के व्रत उपवास का कोई लाभ नहीं मिलता है।

  • कन्या पूजन के लिए शास्त्रों में माना जाता है कि छोटी उम्र की कन्या की पूजा की जाती है। इनकी पूजा करने से ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, जिससे सारे ब्रह्माण्ड की देवशक्तियों का आशीर्वाद मिलता है।
  • नवरात्र के नौ दिन उपवास करने के बाद कन्या पूजन करना जरुरी माना जाता है। कन्या पूजन के लिए 2 साल से लेकर 9 साल की उम्र तक की कन्या का पूजन किया जाता है। इससे बड़ी उम्र की कन्या का पूजन करने से पूजन का फल नहीं मिलता।

  • नवरात्र में 2 से 9 साल की कन्या में देवी स्वरूप 5, 7 या 11 कन्याओं का पूजन किया जाता है इनको केसर युक्त खीर, हलवा, पूड़ी एवं बिना लहसन, प्याज से बनी आलु या कद्दू की सब्जी का भोजन कराया जाता है।
  • कन्या पूजन करने के बाद कन्या को भोजन कराने के बाद इनको सफेद रूमाल, लाल चुनरी, फल, खिलौने और सामर्थ के अनुसार दक्षिणा दिया जाता है।

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