जानिए धर्मशाला के पास बसे भारत के सबसे पुराने किले के बारे में

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से 20कि.मी दूर कांग्रा क्षेत्र में स्थित कांग्रा किला भारत के सबसे पुराने किलो में से एक हैं। यह भारत का सबसे बडा किला हैं यह किला शिवालिक की पहाडियों पर 463एकड में फैला हुआ हैं।

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जयपुर । हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से 20कि.मी दूर कांग्रा क्षेत्र में स्थित कांग्रा किला भारत के सबसे पुराने किलो में से एक हैं। यह भारत का सबसे बडा किला हैं यह किला शिवालिक की पहाडियों पर 463एकड में फैला हुआ हैं। इस किले के चारों तरफ बडी बडी दीवारे हैं जो कि इस किले कि रक्षा के लिए बनाई गई थी। इस किले के पास मांझी और बमगांगा जैसी नदियां भी स्थित हैं। इसके अलावा अगर आपकी किस्मत अच्छी हैं तो आपको धौलधार नदी का सुंदर नजारा देखने को मिल जाएगा।

कांग्रा किले के बारे में कई कहानियां मशहूर हैं जैसे कि लूट, धोकेबाजी और तोडफाड। ऐसा कहा जाता हैं कि यह किला महाराजा सुष्मा चंद्र ने बनवाया था। कटोच वंश का पता प्राचीन त्रिजटा राज्य से चलता है, जिसका उल्लेख महाभारत में महत्वपूर्ण जिले के रूप में मिलता है।

त्रिजटा के राजा सुष्मा चंद्र ने अर्जुन का ध्यान भटकाने पर युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसी बीच द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह रचा, जिससे अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु हो गई। कौरवो को हराने बाद राजा सुष्मा ने कांग्रा का निर्माण किया था। एक समय था जब कांग्रा किला अपार धन के लिए प्रसिद्ध था। यही कारण था कि महमूद गजनी, मोहम्मद बिन तुगलक, फिरोज शाह तुगलक, अकबर ने इस पर हमला किया।

अंततः 1789 में कटोच राजवंश के राजा संसार चंद द्वितीय ने मुगलों से अपना प्राचीन किला जीता, लेकिन 1809 में महाराजा रणजीत सिंह ने किले पर कब्जा कर लिया। 1846 तक, यह सिखों की देखरेख में रहा और उसके बाद यह अंग्रेजों के अधीन हो गया।कांग्रा किले तक पहुँचना बहुत ही आसान हैं। यहां धर्मशाला और मैकलोडगंज से कुछ दूरी पर है। किले के पीछे, महाराजा संसार चंद कटोच का एक संग्रहालय भी है जो कटोच परिवार द्वारा चलाया जाता है। आप एक बार यहां भी जा सकते हैं।

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