किम ने पोप फ्रांसिस को उत्तर कोरिया दौरे के लिए आमंत्रित किया

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उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने पोप फ्रांसिस को प्योंगयांग का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी। दक्षिण कोरियााई राष्ट्रपति मून जे इन के आगामी यूरोप दौरे के संबंध में यहां हुए संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस निमंत्रण का खुलासा किया गया। मून के दौरे में 17 और 18 अक्टबूर को वैटिकन की यात्रा भी शामिल है।

समाचार एजेंसी योनहाप की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रवक्ता किम यूई येओम ने कहा, “चेयरमैन किम (जोंग-उन) ने कहा कि अगर पोप प्योंगयांग का दौरा करते हैं तो वह गर्मजोशी से उनका स्वागत करेंगे।”

मून और किम इस साल तीन बार मिल चुके हैं। दोनों के बीच पिछली बैठक प्योंगयांग में सितंबर माह में हुई थी।

प्रवक्ता ने कहा, “मून जब पोप से मिलेंगे तब प्योंगयांग नेता का संदेश उन तक पहुंचाएंगे।” उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरियाई नेता कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता के लिए वैटिकन का समर्थन मांगेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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