‘खाकी कर्मी’ जल्द ही ‘खादी’ के साथ आएंगे नजर : केवीआईसी

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी पहल करते हुए अर्धसैनिक बलों के सभी डायरेक्टर जनरलों को निर्देश दिया है कि वह खादी कपड़ों का इस्तेमाल करें और ग्रामीण उद्योगों के उत्पादकों का इस्तेमाल अपनी स्टाफ कैंटीन में करें। एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी। खादी विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन (केवीआईसी) के अध्यक्ष वी.के. सक्सेना ने कहा कि केवीआईसी और देश के विभिन्न अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधियों की कई बैठकों के बाद यह कदम उठाया गया है।

पिछले कई हफ्तों तक पूर्व में हुई बैठकें आंशिक रूप से अंतिम चरण में पहुंच गई थी और केवीआईसी ने मंजूरी के लिए खादी के नमूने सूती और ऊनी वर्दी, कंबल, कैमफ्लाश गियर और कैंटीन के स्टाक अर्धसैनिक बलों को सौंपे हैं।

खादी वर्दी के अलावा केवीआईसी ने कई ग्रामीण उद्योगों के उत्पादकों को अर्धसैनिक बलों को प्रदान करने की योजना बनाई है। इसमें अचार, पापड़, शहद, साबुन व डिटर्जेट, शैम्पू, चाय और सरसों का तेल जैसी वस्तुएं कैंटीन के लिए मुहैया करना शामिल हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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