कुंजीभूत तकनीक अपनाने की जरूरत : Xi Jinping

0

चीनी राष्ट्रपति ने हुनान प्रांत की राजधानी छांग शा में एक उत्पाद विनिर्माण उद्यम का निरीक्षण करते समय बल दिया कि कुंजीभूत व केंद्रीय तकनीक और विनिर्माण उद्योग को अपनाने की जरूरत है। उस दिन शी चिनफिंग ने सनवार्ड उपकरण लिमिटेड कंपनी का दौरा किया। 21 साल पहले स्थापित इस कंपनी ने सार्वभौमिक बौद्धिक संपदा अधिकार और केंद्रीय प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति संपन्न 200 से अधिक उच्च स्तरीय साजो सामान का विकास किया, जो 100 से अधिक देशों व क्षेत्रों में निर्यात किये जाते हैं। सनवार्ड विश्व के शीर्ष 50 इंजीनियरिंग मशीन उद्यमों और विश्व के शीर्ष 20 उत्खनक निर्माण उद्यमों में शामिल है।

छांग शा में मा लान शान वीडियो सांस्कृतिक सृजन व्यवसाय पार्क में शी चिनफिंग ने सांस्कृतिक सृजन की रचनाएं देखीं और युवा कार्यकतार्ओं के साथ बात की।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleSSR Death Case: सुशांत केस में नया मोड़ सलमान, एकता और करण सहित इन 8 सेलेब्स को कोर्ट में होगी पेशी
Next articleImmunity boosters:डाइट में इन चीजों को करें शामिल, शरीर की इम्यूनिटी क्षमता होगी मजबूत
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here