राजनीति को किनारे रखकर, चलिए आंध्र के लिए एक संगठित आवाज बनें : Nara Lokesh

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तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री नारा लोकेश ने राज्य के मुद्दों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘संगठित होने और एक एकजुट आवाज’ का आह्वान किया। लोकेश ने गुरुवार को विजयवाड़ा में युवाओं से अपील करते हुए कहा, “हम राज्य में राजनीतिक रूप से लड़ेंगे, लेकिन जब हम बाहर निकलते हैं, तो हमें एक स्वर के साथ रहना चाहिए। यह हमारा राज्य है, हमें अपने राज्य का ख्याल रखना होगा।”

टीडीपी महासचिव ने कहा कि वह इस एकजुट आवाज के विचार पर टिके रहेंगे और इसका पालन करेंगे।

लोकेश ने कहा, “एक पूर्व मंत्री के रूप में, मैंने आंध्र प्रदेश को बढ़ावा देने के लिए जो भी मदद की, मैं हमेशा करता रहूंगा। मैं हमेशा साथ रहूंगा। हम हमेशा साथ काम करेंगे।”

हालांकि, एक पार्टी के रूप में, उन्होंने कहा कि वे राज्य में लड़ना जारी रखेंगे।

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (वीएसपी) के निजीकरण के विरोध में एक राज्यव्यापी बंद (हड़ताल) चल रहा है। राज्य में वाईएसआरसीपी सरकार ने इस दिन भर के बंद का समर्थन किया है।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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