कैटिच ने प्रतिबंध के खिलाफ अपील न करने के फैसले को सराहा

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पूर्व आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज साइमन कैटिच ने बॉल टेम्परिंग मामले में प्रतिबंधों के खिलाफ अपील न करने के स्टीव स्मिथ, डेविड वार्नर और कैमरून बेनक्राफट के फैसले की प्रशंसा की है। स्मिथ, वार्नर और बैनक्राफट को दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन टेस्ट मैच के दौरान बॉल टेम्परिंग ( गेंद से छेड़छाड़) करने का दोषी पाया गया था। इसके बाद क्रिकेट आस्ट्रेलिया (सीए) ने मामले की जांच के बाद स्मिथ और वार्नर पर एक-एक साल का और बेनक्राफ्ट पर नौ महीने का प्रतिबंध लगा दिया है।

कोलकाता नाइटराइडर्स के बल्लेबाजी कोच कैटिच ने कहा,” तीनों खिलाड़ियों ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अपील नहीं की है। इसके लिए खिलाड़ियों की तारीफ करनी चाहिए जिन्होंने सजा को स्वीकार कर लिया है।”

उन्होंने कहा कि तीनों अच्छे युवा हैं। दुर्भाग्य से उन्होंने एक बड़ी गलती की। सभी कभी न कभी अपनी जिंदगी में कोई न कोई गलती करते हैं। पूरी उम्मीद है कि तीनों प्रतिबंध की अवधि पूरी होने के बाद और बेहतर खिलाड़ी बनकर लौटेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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