कश्मीर की पहली महिला व्हीलचेयर बास्केटबॉल प्लेयर हैं 24 साल की इंशाह बशीर

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दोस्तों, आज हम आपको पहली महिला व्हीलचेयर बास्केटबॉल प्लेयर के बारे में बताने जा रहे हैं । जिसका नाम बशीर है बताया जा रहा है कि, जब 15 साल की थी तब एक ऐक्सीडेंट में उनके स्पाइनल पर काफी गहरी चोटें आईं । कश्मीर के बडगाम जिले की रहने वाली इंशाह को सही वक्त पर इलाज नहीं मिल पाया।
बताया जा रहा है कि, उन्हें बचपन से ही बास्केटबॉल खेलने का शौक था और से हादसा होने के बाद भी ये शौक कायम रहा । व्हीलचेयर पर आने के बाद भी इंशाह ने खेलते रहने का फैसला किया। कश्मीर में लड़कियां खेल में कम हिस्सा लेती हैं ।

इंशाह ने बताया कि मैंने कई लोगों को देखा जिनकी हालत मुझसे भी ज्यादा खराब थी लेकिन इसके बावजूद वो बास्केटबॉल खेल रहे थे, तो मैं क्यों नहीं खेल सकती थी । उन लोगों ने मुझसे आग्रह किया कि मैं उनकी टीम जॉइन करूं। पहले तो मुझे लगा कि मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगी लेकिन मैंने कर दिखाया । आपको जानकर हैरानी होगी कि, इंशाह 2017 में राष्ट्रीय स्तर पर ‘रेस्ट ऑफ इंडिया’ में सेलेक्ट हुई थीं ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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