कश्मीरी छात्रों ने महाराष्ट्र में बाढ़ पीड़ितों की सहायता की

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घर से दूर आर्थिक तंगी का सामना करने वाले कश्मीर के सौ छात्रों ने इस साल ईद का त्योहार नहीं मनाने और अपनी बचत का पैसा दक्षिण-पश्चिम महाराष्ट्र के जिलों के बाढ़ पीड़ितों की सहायता में लगाने का फैसला किया। इस कार्य के लिए वे स्थानीय ग्रामीणों की सराहना हासिल कर रहे हैं। ‘सरहद’ के अध्यक्ष संजय नाहर ने कहा कि गैर सरकारी संगठनों ‘सरहद’ और ‘गदजुन्जर मावले’ के जरिए जाहिद भट्ट, फिरदौस मीर और यूनुस भट्ट के नेतृत्व में कश्मीरी युवाओं की टीम ने कोल्हापुर के सबसे बुरी तरह से प्रभावित बुबनाल गांव की यात्रा की।

नाहर ने आईएएनएस से कहा, “छात्रों ने महसूस किया कि प्राकृतिक आपदा से बड़े पैमाने पर हुए नुकसान को देखते हुए उन्हें इस बार ईद का त्योहार नहीं मनाना चाहिए और इसके बजाय बचत के पैसे से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करनी चाहिए। यह एक सच्चा सराहनीय कदम है।”

बीते सप्ताह उन्होंने ट्रक से कपड़ों, खाद्य सामग्री और घेरलू इस्तेमाल का सामना बुबनाल के 100 परिवारों को दान में दिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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