कैसे साबित करेगी भाजपा कर्नाटक में बहुमत?

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जयपुर। एक रात में क्या से क्या नहीं हो जाता। यहां तो पल भर में सबकुछ हो जाता है, तो ये तो एक रात की बात थी। भाजपा के लिए सबसे राहत की खबर ये रही कि कांग्रेस की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया और येदियुरप्पा ने आज सुबह कर्नाटक के सीएम के तौर पर शपथ ले ली। इस तरह से भाजपा को अब राज्यपाल के आदेश के तहत 15 दिनों के अंदर बहुमत साबित करना होगा।

ये इतना आसान कैसे हो सकता है? भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए 112 विधायकों की ज़रुरत होगी और उसके पास अभी मात्र 104 विधायक ही हैं। इस तरह से उसे निर्दलियों के साथ की जरुरत तो है ही, पर इसके साथ ही उसे कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों को भी तोड़ना होगा।

कर्नाटक में 224 सीटों की विधानसभा है, जिसमें 222 सीटों पर ही चुनाव हुए थे। भाजपा ने 104, कांग्रेस ने 78 और जेडीएस+ ने 38 सीटें हासिल की थी। अन्य के खाते में 2 सीटें गई थीं।

भाजपा ने दावा किया है कि लिंगायत समुदाय से आने वाले 7 विधायक उसके साथ हैं और जेडीएस समर्थित बसपा के भी एक विधायक उनके समर्थन में आ सकते हैं। इसके साथ ही निर्दलीय 2 विधायक भी भाजपा को समर्थन दे सकते हैं। इस तरह से भाजपा के पास कुल 114 विधायकों का समर्थन हो जाएगा।

15 दिनों के अंदर भाजपा को विधानसभा में बहुमत दिखाना होगा और इसके लिए फ्लोर टेस्ट किया जाएगा। भाजपा को अगर बहुमत दिखाना है तो या तो कांग्रेस के 7 विधायकों को उनके पक्ष में आना होगा या फिर उन्हें अनुपस्थित रहना होगा। अगर 7 विधायक कांग्रेस के पक्ष में आ गए, तो भाजपा को साफ बहुमत मिल जाएगा।

लेकिन अगर पक्ष में ना आकर वो सिर्फ अनुपस्थित ही हो जाएं, तो भी भाजपा को फायदा होगा। 7 विधायकों के अनुपस्थित होने से विधानसभा 215 संख्या की हो जाएगी। फिर बहुमत का आंकड़ा 108 हो जाएगा। लेकिन तब भी भाजपा को बहुमत हासिल करने के लिए 1 विधायक की ज़रुरत होगी। इससे वो फिर से बहुमत साबित करने से चूक सकती है।

कांग्रेस और जेडीएस को भाजपा के बहुमत साबित ना कर पाने की स्थिति में सरकार बनाने का मौका दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस और जेडीएस के पास कुल 116 विधायक हैं, जो कि बहुमत से 4 सीटें ज़्यादा हैं। इस तरह से कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बन सकती है।

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