Kanya Sankranti 2020: कन्या संक्रांति पर करें सूर्यदेव की पूजा, अनुकूल समय की होगी शुरुआत

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हिंदू धर्म में सूर्य देव की पूजा आराधना का विशेष महत्व होता हैं वही भगवान भास्कार एक राशि में एक महीने तक रहते हैं सूर्यदेव का सिंह राशि से कन्या राशि में गोचर करना कन्या संक्रांति कहलाता हैं इस संक्रांति को स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए शुभ माना जाता हैं कन्या संक्रांति को अनुकूल अवधि की शुरुआत का प्रतीक माना गया हैं सूर्य देव अश्विन मास में राशि परिवर्तन करने के कारण इस संक्रांति को अश्विन संक्रांति के नाम से जानते हैं। संक्रांति का पुण्यकला विशेष माना गया हैं और इस पुण्यकाल में पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता हैं। वही हर संक्रांति का अपन अलग महत्व होता हैं कन्या संक्रांति भी अपने आप में खास मानी जाती हैं कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती हैं भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षमता में वृद्धि होती हैं कार्यक्षेत्र और कारोबार में आने वाली परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। धन और वैभव की प्राप्ति होती हैं कन्या संक्रांति पश्चिम बंगाल और ओडिशा राज्य में विशेष तौर पर मनाया जाता हैं इसी मान्यता है कि अगर कन्या संक्रांति के दिन पूरे विधि विधान के साथ भगवान सूर्य देवता की पूजा आराधना की जाए तो जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं कन्या संक्रांति के दिन जरूरतमंद और गरीब लोगों की सहायता करना और उन्हें दान देना अच्छा माना जाता हैं। सूर्य देव बुध प्रधान कन्या राशि में जाएंगे। इस तरह कन्या राशि में बुध और सूर्य का मिलन होगा। इससे बुधादित्य योग का निर्माण होता हैं जिससे शुभ माना गया हैं।

 

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